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रोजाना 20 हजार किसान छोड़ रहे हैं खेती!

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देश के कृषि संकट से निजात दिलाने के सरकारी दावे बेशक तमाम हैं। मगर कृषि क्षेत्र की दुर्दशा से परेशान होकर रोजाना 20 हजार से ज्यादा किसान खेती छोड़ कर अन्य पेशा अपना रहे हैं।
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देश में खेती के हालातों को लेकर फिक्की और टाटा स्ट्रेटजिक मैनेजमेंट ग्रुप (टीएसएमजी) का जो आकलन सामने आया है वह बेहद चिंताजनक है। फिक्की और टीएसएमजी का कहना है कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में खेती से जुड़े लोगों की संख्या 11 करोड़ 90 लाख थी। लेकिन 2015 तक यह संख्या प्रतिदिन 2,0003 की दर से कम हो रही है।

खेती की बदहाली के लिए कृषि भूमि में कमी, खेतों के घटते आकार, ज्यादा पशुपालन, सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भरता के साथ नकली बीज, रसायनों और कीटनाशकों का अति इस्तेमाल जिम्मेदार हैं।
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25 प्रतिशत नकली दवाओं का इस्तेमाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 25 प्रतिशत से ज्यादा नकली दवाओं और कीटनाशकों का खेती में इस्तेमाल हो रहा है। इसके चलते चालू वर्ष में करीब 10.6 लाख टन खाद्य उत्पादन का नुकसान हुआ है।

वहीं पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष कपास फसल की बर्बादी के लिए भी खुद भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने गलत रसायन के उपयोग को दोषी माना है।

देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र के कम हो रहे योगदान पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2001-02 में 19.34 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2013-14 में कृषि क्षेत्र का योगदान 15.79 ही रह गया।

इस गिरावट को अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव और निर्माण व सेवा क्षेत्र में बढ़ते अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना गया है।

 
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