देश के कृषि संकट से निजात दिलाने के सरकारी दावे बेशक तमाम हैं। मगर कृषि क्षेत्र की दुर्दशा से परेशान होकर रोजाना 20 हजार से ज्यादा किसान खेती छोड़ कर अन्य पेशा अपना रहे हैं।
देश में खेती के हालातों को लेकर फिक्की और टाटा स्ट्रेटजिक मैनेजमेंट ग्रुप (टीएसएमजी) का जो आकलन सामने आया है वह बेहद चिंताजनक है। फिक्की और टीएसएमजी का कहना है कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में खेती से जुड़े लोगों की संख्या 11 करोड़ 90 लाख थी। लेकिन 2015 तक यह संख्या प्रतिदिन 2,0003 की दर से कम हो रही है।
खेती की बदहाली के लिए कृषि भूमि में कमी, खेतों के घटते आकार, ज्यादा पशुपालन, सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भरता के साथ नकली बीज, रसायनों और कीटनाशकों का अति इस्तेमाल जिम्मेदार हैं।