पाकिस्तान के तय समय पर ही विदेश सचिव स्तर की वार्ता होने के दावे के बावजूद इस पर संशय कायम है। भारत ने इस संबंध में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
किसी प्रकार की प्रतिक्रिया न दे कर भारत ने एक बार फिर से पठानकोट आतंकी हमला मामलों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपनी मांग पर डटे रहने का संकेत दिया है।
गौरतलब है कि इस हमले के बाद सरकार घरेलू मोर्चे पर विपक्ष के सियासी हमलों से घिरी हुई है। यही कारण है कि विदेश मंत्रालय ने बीते हफ्ते साफ तौर पर कहा था कि वार्ता मामले की गेंद पाकिस्तान के पाले में है।
भारत सबूत उपलब्ध कराने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की ओर से दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
पाक को नहीं दिया गया कोई संदेश
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत ने पठानकोट हमले के बाद विदेश सचिव स्तर की वार्ता पर फिलहाल पाकिस्तान को कोई संदेश नहीं दिया है। इस हमले के बाद भारत ने लगातार इसमें शामिल लोगों और संगठन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बाद विदेश मंत्रालय ने अलग-अलग समय में पाकिस्तान को वार्ता से पहले कार्रवाई के सहारे विदेश सचिव स्तर के लिए वार्ता का माहौल बनाने का संदेश दिया है।
चूंकि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और न ही विदेश सचिव स्तर की वार्ता पर नए सिरे से सरकार में बात हुई है, ऐसे में पाकिस्तान के दावे के बावजूद असमंजस कायम है।
पाक के साथ संपर्क बाधित करने की जरूरत नहीं
वहीं कांग्रेस पार्टी ने रविवार को कहा कि पठानकोट एयरबेस पर हमले के बावजूद पाकिस्तान के साथ संपर्क बाधित करने की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह सरकार को तय करना है कि संपर्क का स्तर, प्रकृति और तीव्रता क्या होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी कह चुकी है कि इस उकसावे के बावजूद पाकिस्तान के साथ संपर्क को बाधित करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि पठानकोट हमले, सुरक्षा की स्थिति और पाकिस्तान के साथ बातचीत के संदर्भ में सरकार ने विपक्ष के साथ कोई सूचना साझा नहीं की है। भाजपा पर कटाक्ष करते हुए सिंघवी ने कहा कि यह सरकार के ऊपर निर्भर करता है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत में देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।