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मालदा हिंसाः मिनी अफगानिस्तान से कम नहीं है कालियाचक

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अफीम की खेती और हथियारों की तस्करी के लिए अफगानिस्तान दुनिया भर में कुख्यात है। पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मुद्दे पर हिंसा और आगजनी का शिकार पश्चिम बंगाल के मालदा जिले का कालियाचक इलाका भी अफगानिस्तान से कम नहीं है। अंग्रेजी दैनिक मेल टुडे के मुताबिक, भारत और बांगलादेश की सीमा पर बसा ये इलाका अफीम की खेती, हथियारों की तस्करी और उग्रवाद के गठजोड़ के कारण हिंदुस्तान का अफगानिस्तान बन गया है
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उल्लेखनीय है कि रविवार को उत्तर प्रदेश के एक हिंदुत्ववादी नेता की ओर से पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के विरोध में मालदा जिले के कालियाचक कस्बे में एक रैली निकली थी, जिसमें हजारों की संख्या में मुसलमान शामिल थे।

रैली में शामिल प्रदर्शनकारी उस वक्त हिंसक हो गए, जब पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। उन्होंने कालियाचक पुलिस थाने और क्षेत्र विकास अधिकारी कार्यालय में तोड़फोड़ कर आग लगा दी । सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, बीएसएफ और एनबीएसटीसी के वाहनों को जला दिया। 30 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।
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मालदा ‌में सांप्रदायिक दंगों का पुराना इतिहास

मालदा ‌जिले में सांप्रदायिक दंगों का पुराना इतिहास रहा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, जिले में हिंदुओं और मुस्लिमों की आबादी लगभग एक बराबर है। 2010 में डेगांग और 2013 में केनिंग में हुए दंगों के चलते ये जिला चर्चा में रहा। फिलहाल कालियाचक में हुए उपद्रव सोशल मीडिया में बहस का मुद्दा बन गया है।

कालियाचक में अफीम की खेती आम बात है। गोलपगंज बस स्टेंड से होकर गुजरती सर्पीली सड़क के इर्दगिर्द हरे भरे खेत हैं, जिनकी हरियाली आपको लुभा सकती है। हालांकि ये ऐसा इलाका है, जिसमें बाहरी व्य‌क्तियों को प्रवेश वर्जित है। उन हरीभरी वादियों को खोकर आप प्रतिबंधित इलाके में पहुंच गए तो जान भी जा सकती है। बंदूक ल‌िए नौजवान उन खेतों की रखवाली करते रहते हैं, जिनमें अफीम बोई जाती है। ये ऐसा इलाका है, जहां प‌श्चिम बंगाल सरकार का शासन नहीं चलता, बल्‍कि अफीम के व्यापारियों और हथियार के तस्करों की तूती बोलती है।

कालियाचक-3 ब्लॉक में अफीम की खेती और उसका अवैध व्यापार बड़ी मात्रा में होता है। स्‍थानीय निवासी ही इस धंधे में संलिप्त हैं। मालदा जिले में होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों में नशे के इसी कारोबार का पैसा इस्तेमाल होता है।

अफीम की खेती से मिलने वाले पैसे से हो रहा अवैध कारोबार

पुलिस के मुताबिक, अफीम की खेती से मिलने वाले पैसे से अत्याधुनिक किस्म के हथियार खरीदे जाते हैं, जिनकी तस्करी सीमा पार बांगलादेशी इलाकों से होती है। भारत और बांगलादेश की सीमा पर कई इलाके ऐसे हैं, जिनसे होकर अवैध कारोबार होता रहता है। अफीम के कारोबार के पैसों से भारत-बांगलादेश की सीमा पर कई अवैध मदरसे भी चलाए जाते हैं।

मेल टुडे से बातचीत में पश्चिम बंगाल की खुफिया शाखा के पुलिस महानिदेशक राज कनोजिया ने बताया, "यह सच है कि ये इलाका नशे के अवैध करोबार, नकली करंसी के रैकेट का केंद्र हो गया है और ऐसा इस इलाके की रणनीतिक स्थिति के कारण हु‌आ है।"

कालियाचक में प्रदर्शनकारियों ने थाने में भी आगजनी की थी। उन्होंने 35 वाहनों को आग लगा दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पैंगबर मोहम्‍मद के खिलाफ में ‌‌‌‌दिए बयान के विरोध की आड़ में स्‍थानीय प्रशासन को डराने की कोशिश की गई थी। प्रशासन इलाके में हो रही अफीम की खेती पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा था, उसकी बदला लेने के लिए ‌थाने में आगजनी की गई और कई अहम सबूत भी जला दिए गए।

मिनी अफगानिस्तान बन चुका है कालियाचक

कालियाचक के जिन खेतों में अफीम की खेती होती है, वे बांगलादेश की सीमा से महज 8 किमी की दूरी पर हैं। यहां बच्चे भी अफीम के पौधों से दूध उतार लेते हैं, जिसे रासायनिक भाषा में पापेवेर सॉम्निफेरम कहा जाता है। इसी दूध से हेरोइन बनाई जाती है।

नशे के कारोबार के कारण सीमा पर बसे गोलपगंज, बालियाडांगा, कालियाचक, मोहब्बतपुर, मोथाबाड़ी, और डांग जैसे इलाके राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं। मालदा जाली करंसी, मानव और हथियारों की तस्करी का उभरता अड्डा बन गया है।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ये इलाका मिनी अफगानिस्तान बन चुका है। कालियाचक की स्थि‌ति चिंताजनक हो गई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उस इलाके में एक कार पकड़ी गई ‌थी, जिसमें भारी मात्रा में कैश था। हालांकि किसी बहुत ही प्रभावशाली आदमी के फोन के कारण उसे छोड़ना पड़ा ‌था।
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कालियाचक में बंदूक लहराते नौजवानों का दिखना आम

कालियाचक में बंदूक लहराते नौजवानों का दिखना आम बात है। ये अफीम के खेतों और इलाके के रखवाली का दावा करते हैं। अफीम की खेती नवंबर-दिसंबर में शुरु होती है ओर फरवरी मार्च तक फसल तैयार हो जाती है।

इम्तियाज नामक एक युवक ने मेल टुडे से बातचीत में बताया, ''अफीम का एक किग्रा दूध 60,000 से 70,000 रुपए में बिकता है। एक फूल से तकरीबन 30 ग्राम दूध निकलता है।" कालियाचक में युवा बाकी दिनो में कोई और काम-धंधा करते हैं, जबकि ठंड में अफीम की खेती होती है। अफीम के दूध में तकरीबन 12 फीसदी एनल्जेसिक अल्कालॉइड मॉर्फीन होती है, जिससे हेरोइन ओर कई नशीले पदार्थ बनाए जाते हैं। मालदा के पड़ोसी मुर्शिदाबाद जिले में हेरोइन भी बनती है।

उल्‍लेखनीय कि अफगानिस्तान फिलहाल अफीम का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। पाकिस्तान, म्यांमार, कोलंबिया, ग्वाटेमाला और मेक्सिको में भी भी अफीम की खेती होती है।
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