देश के चुनिंदा 20 जिलों में शुरू हुई नकद सब्सिडी हस्तांतरण योजना से लाखों लोगों के लाभान्वित होने के साथ कई लोग इसका खामियाजा भी भुगत रहे हैं।
नकद रसोई गैस सब्सिडी पाने के लिए जरूरी दस्तावेज तय समय सीमा में नहीं देने वाले ग्राहकों को अब रियायती सिलेंडर भी बाजार मूल्य पर लेना पड़ रहा है।
20 जिलों में शुरू की गई योजना के बाद जिन उपभोक्ताओं ने 31 अगस्त तक आधार लिंक बैंक खाता और उपभोक्ता नंबर का ब्यौरा तेल कंपनियों को उपलब्ध नहीं कराया है, उन्हें रियायती रसोई गैस के लिए ढाई गुना कीमत चुकाना पड़ रही है।
आम आदमी को राहत देने के उपाय पेश करने की जगह यह कहा जा रहा है कि कई ग्राहक सब्सिडी लेने को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। उन्हें सब्सिडी की जरूरत नहीं है। इसलिए उन्होंने अपना ब्यौरा तेल कंपनियों के साथ सांझा नहीं किया है। इसके अलावा मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया है कि आधार की अनिवार्यता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने तक उन्हें बाजार मूल्य का भुगतान करना होगा।
पेट्रोलियम मंत्रालयों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले दो माह में करीब 15 लाख से ज्यादा रियायती सिलेंडरों की बिक्री बाजार मूल्य पर हुई है। महत्वपूर्ण यह है कि 1 नवंबर से देश के 46 जिलों में शुरू की गई आधार लिंक एलपीजी सब्सिडी योजना में आधार को अनिवार्य बनाने पर जोर नहीं दिया जा रहा है।
अधिकारी ने कहा कि अब तक जिन जिलों में यह योजना शुरू हुई है, वहां आधार को बैंक खाते और एलपीजी उपभोक्ता नंबर से लिंक कराने के लिए ग्राहकों को 90 दिनों का समय दिया गया है। लेकिन उम्मीद है कि तीन माह के पहले ही आधार की अनिवार्यता पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आ जाएगा। अगर नकद सब्सिडी के लिए आधार को अनिवार्य नहीं किया गया तो इस दौरान दूसरे विकल्प भी पेश किये जा सकते हैं। इसलिए इन जिलों में फिलहाल आधार को अनिवार्य नहीं बताया गया है।