नदियों एवं ऐतिहासिक इमारतों को प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार खुले में शवों के दाह संस्कार पर सख्ती से रोक लगाने पर विचार कर रही है।
इसके लिए केंद्र ने राज्य सरकारों के सहयोग से व्यापक योजना तैयार की है। जिसके तहत नदियों के किनारे खुले में चल रहे शवदाह गृहों को बंद करने या फिर उन्हें विद्युत शवदाह गृह में तब्दील करना जरूरी हो जाएगा।
केंद्र ने नदियों को प्रदूषित करने वाले ऐसे 150 स्थानों को चिन्हित किया है। इन स्थानों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नए सिरे से पहल की जाएगी।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के मुताबिक केंद्र की प्रदूषण मुक्त कराने की योजना पर राज्यों को सख्ती से अमल करना होगा।
खासकर नदियों, ऐतिहासिक इमारतों और ऐतिहासिक धरोहरों को प्रदूषण मुक्त कराने की योजना पर कागजी कार्यवाही नहीं चलेगी।
केंद्र की प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं की लगातार निगरानी की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण की नई योजना में नदियों के किनारे विद्युत शवदाह गृहों का निर्माण अनिवार्य किया जा रहा है।
पर्यावरण राज्यमंत्री जयंती नटराजन के मुताबिक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) के साथ मिलकर ऑक्सीजन, जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) और फेकल कॉलीफॉर्मस आदि के संबंध में नदियों की जल गुणवत्ता की मॉनीटरिंग की जा रही है।
नटराजन के मुताबिक नई पहल के तहत खुले में शवों के दाह संस्कार पर रोक लगाने के अलावा शहरों के गंदे नालों को सीधे नदियों में गिराना प्रतिबंधित किया जाएगा।
साथ ही औद्योगिक कचरे के शोधन के बगैर नदियों में बहाने पर भी सख्ती से रोक लगाई जाएगी। इसके लिए राज्यों को आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।