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तेलंगाना पर बगावत, मंत्रियों के इस्तीफों की झड़ी

Fri, 04 Oct 2013 09:47 PM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
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आगामी चुनावों में राजनीतिक फायदे के लिए आंध्र प्रदेश के विभाजन का दांव कांग्रेस के लिए भारी पड़ रहा है। अलग तेलंगाना राज्य के गठन के विरोध में सीमांध्र के केंद्रीय मंत्रियों ने बगावत कर दी है और इस्तीफे की झड़ी लगा दी है।
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इन मंत्रियों को मनाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को खुद सामने आना पड़ा लेकिन बात नहीं बनी। वहीं आंध्र प्रदेश के सीमांध्र इलाके में अलग राज्य के गठन का विरोध तेज हो गया है।

आंध्र के मुख्यमंत्री एन किरण रेड्डी खुद इस मसले पर बागी तेवर अपनाए हुए हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने सीमांध्र के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से शुक्रवार को मुलाकात कर स्थिति की समीक्षा की।
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वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगनमोहन रेड्डी ने 72 घंटे के बंद का आह्वान किया है और वह शनिवार से संयुक्त आंध्र की मांग पर अनशन पर भी बैठ रहे हैं।

तेलंगाना गठन के विरोध में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है जबकि केंद्रीय रेल राज्य मंत्री सूर्यप्रकाश रेड्डी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

इसके अलावा पर्यटन मंत्री चिरंजीवी, राज्यमंत्री पुरंदेश्वरी और किल्ली कुरुपारानी ने भी इस्तीफे के लिए प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है। पल्लम राजू ने सोनिया से शुक्रवार सुबह मुलाकात की।

राजू ने उनसे कहा कि इस्तीफा देने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है। अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो उनका दोबारा जीतकर आना असंभव है।

राजू ने बताया कि उन्होंने बृहस्पतिवार को ही प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री ने जल्दबाजी में फैसला नहीं लेने को कहा। इसके बाद पूरी रात सोचने के बाद उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।

वहीं केंद्रीय मंत्री के एस राव पर भी इस्तीफा देने का दबाव है, जबकि पर्यटन मंत्री चिरंजीवी ने बृहस्पतिवार को ही हैदराबाद से अपना इस्तीफा भेज दिया था। शुक्रवार को रेणुका चौधरी ने भी मुलाकात कर तेलंगाना राज्य पर बात की।

कांग्रेस ने नाराज सांसदों और मंत्रियों से संयम बनाए रखने और राज्य के बंटवारे के फैसले को लागू करने में मदद की अपील की है। मगर प्रदेश के सियासी समीकरण लगातार कांग्रेस के खिलाफ जा रहे हैं।
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तेलंगाना राज्य के गठन का फैसला कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता माना जा रहा था। लेकिन पार्टी के अंदर बढ़ रहा विरोध उसकी परेशानी बढ़ा सकता है।
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