रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी में फूट पड़ती दिखाई दे रही है। यूपीए को बाहर से समर्थन दे रही पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने एफडीआई पर हुई वोटिंग में सरकार के पक्ष मतदान करने से इनकार कर दिया।
यूपीए-1 में ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके सिंह ने कहा, ‘मेरे सिद्धांत मुझे राजनीतिक मजबूरियों की खातिर समझौता करने की अनुमति नहीं देते हैं। मेरे अंतर्मन ने मुझे वालमार्ट के हित में वोट करने की इजाजत नहीं दी।’ पार्टी उपाध्यक्ष सिंह ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को उनके और लालू के बीच काफी बहस भी हुई।
उन्होंने कहा कि पार्टी को राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के सिद्धांतों पर ही चलना चाहिए और गरीबों के हित में काम करना चाहिए। रघुवंश प्रसाद सिंह वोटिंग के समय सदन से बाहर चले गए जबकि पार्टी प्रमुख लालू समेत तीन सांसदों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट डाला।
विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी ने हालांकि पार्टी में फूट की अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘आरजेडी ने इस मुद्दे पर कोई व्हिप जारी नहीं किया था, इसलिए हर कोई अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र था। यह पार्टी में लोकतंत्र प्रणाली को दर्शाता है।’
इस आपसी फूट पर टिप्पणी करते हुए जेडी (यू) के नेता और ग्रामीण कार्य मंत्री भीम सिंह का कहना है कि रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे समाजवादी विचारधारा वाले नेता को आरजेडी में उचित सम्मान नहीं मिल रहा है और उन्हें पार्टी छोड़ देनी चाहिए। एफडीआई पर समर्थन देकर भला लालू कैसे गरीबों का भला कर सकते हैं।