मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नए महासचिव सीताराम येचुरी चुने गए हैं। उनका चुनाव निर्विरोध हुआ है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की विशाखापत्तनम में चल रही कांग्रेस के अंतिम दिन रविवार को पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने उनका नाम प्रस्तावित किया और पार्टी की केंद्रीय समिति ने उन्हें तीन साल के लिए पार्टी महासचिव चुना। आंध्र प्रदेश के 63 वर्षीय येचुरी उदारवादी सोच वाले नेता माने जाते हैं और अर्थशास्त्र तथा गठजोड़ की राजनीति के माहिर हैं।
सीतराम येचुरी इससे पहले पार्टी के अंदरूनी फोरम पर पार्टी की कुछ नीतियों पर सवाल भी लगातार उठाते रहे हैं। येचुरी ने कहा कि हमें पार्टी संगठन को मजबूत करना होगा ताकि देश की पार्टी के सामने की चुनौतियों का सामना कर सकें। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पूंजीवाद में संकट गहरा गया है और समाजवाद के संघर्ष को मजबूत किए बिना लोगों के लिए कोई निजात नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद भारतीय इतिहास को दोबारा लिखने के प्रयास हो रहे हैं। सांप्रदायिकता फैल रही है और लोकतांत्रिक परंपराएं कमजोर हो रही हैं। इसी का सामना करना हमारे लिए चुनौती है।
वहीं सीताराम येचुरी को पार्टी महासचिव बनाए जाने पर पार्टी पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने कहा है कि वे अब कमजोर तकबों के लोगों के हित में अपना संघर्ष और तेज करेंगे। उन्होंने निशाना भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हिंदुत्ववादी और सांप्रदायिक ताकतों जो बीजेपी के पावर में आने के बाद बढ़ गई हैं उसे रोकने के लिए वे काम करेंगे।
पिछले लोकसभा चुनावों में लगातार सीटें घटने और केरल एवं पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में हार के बावजूद पार्टी इन राज्यों में अभी भी सक्रिय है। अभी सिर्फ त्रिपुरा ही एकमात्र राज्य है जहां पार्टी की सरकार है। पश्चिम बंगाल में करीब 35 साल पार्टी ने शासन किया जबकि केरल में भी उसकी सरकारें रही हैं। पार्टी को 2004 के चुनाव में सबसे ज्यादा 5.66 प्रतिशत वोट मिले थे तब पार्टी ने लोकसभा की सबसे ज्यादा 43 सीटें जीती थीं।