भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने कहा है कि वो सरकार के साथ वार्ता के लिए तैयार है। पर सरकार को उसकी कुछ मांगे माननी होंगी।
इसके लिए उन्होंने मांग की है कि जेल में बंद उनके वरिष्ठ नेताओं को रिहा किया जाए ताकि वार्ता के लिए माओवादियों की तरफ से प्रतिनिधिमंडल का गठन किया जा सके।
संगठन का कहना है कि वार्ता 'सचमुच की शांति के लिए और ईमानदारी के साथ' होनी चाहिए। माओवादियों का मानना है कि शान्ति वार्ता दो विरोधी राजनीतिक गुटों के बीच चल रहे राजनीतिक संघर्ष का एक अहम हिस्सा है।
संगठन की केंद्रीय कमिटी के प्रवक्ता अभय के साक्षात्कार के रूप में जारी किये गए बयान में उनके हवाले से कहा गया है कि सरकार को चाहिए कि वो 'माओवादी आंदोलन को एक राजनीतिक आंदोलन' के रूप में स्वीकार करे।
अभय का कहना है, "शान्ति वार्ता के लिए ज़रूरी है कि सरकार माओवादियों के आंदोलन को देश के लोगों का आंदोलन, एक आंतरिक संघर्ष और गृह युद्ध के रूप में स्वीकार करे। तब कहीं जाकर ये सम्भव हो पायेगा की वार्ता के ज़रिए बुनियादी मुद्दों को सुलझाया जा सकेगा ताकि ये गृह युद्ध ख़त्म हो पाए।