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'देती होगी कहीं, बिहार में गाय वोट नहीं देती'

Mon, 09 Nov 2015 03:51 PM IST
वुसअतुल्लाह ख़ान/पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी के लिए
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कभी-कभी बेवक्त का मजाक भी दुश्मनी का कारण बन जाता है, कई बार ज्यादा पकाने से पकवान खराब हो जाता है। अगर मोहन भागवत बिहार चुनाव से पहले कुछ कहने से परहेज करते तो इसका फायदा भाजपा को ही होता।
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जब आप अरहर की दाल आसमान से जमीन पर लाने की बजाय, सवा लाख करोड़ के विकासशील तारे तोड़कर वोटरों की झोली में डालने जाएंगे तो यही होता है। जब आप जीत के सारे आंकड़े डेढ़ साल पहले की जीत के साए तले बनाएंगे तो यही होगा जो हो गया।हो सकता है बहुत सी जगहों में गाय वोट भी देती हो लेकिन बिहार में गाय दूध ही देती है।

वरना पिछले 26 सालों में यहां एक-आध मुंबई, गुजरात या अयोध्या तो हुआ होता। अमित शाह ने कहा- क्या तुम जंगल राज में वापस जाना चाहते हो? बिहारियों ने कहा- हां जाना चाहते हैं।
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अमित शाह ने कहा- अगर महागठबंधन आ गया तो पिछड़े वर्गों से आरक्षण का कोटा छीन कर अल्पसंख्यकों (यानि मुसलमानों) को बांट दिया जाएगा। मतदाताओं ने कहा- भले बांट दे, तुम्हें क्या।मोदी ने कई रैलियों में से एक में कहा- यह चुनाव दिखा देगा कि 21वीं सदी में बिहार भारत और विश्व के नक्शे में कहां खड़ा है। बिहारियों ने बता दिया- देखो हम यहां खड़े हैं, तुम कहां खड़े हो?

वैसे आपस की बात है, जब एक पार्टी बिहार को पिछड़ेपन, गरीबी, अंधेरे, बेरोजगारी, कच्ची सड़कों से मुक्त करना चाह रही थी। शिक्षा, अस्पताल, रौशनी गांव-गांव दान कर रही थी और इसके लिए एक भारी पैकेज का भी ऐलान हो चुका था। तो बिहारियों को कुछ तो विश्वास करना चाहिए था, आदर देना चाहिए था। ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए था जैसा उन्होंने कर डाला।
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पाक में भी हैं बिहार जैसे वोटर

मगर भाजपा को दिल छोटा नहीं करना चाहिए, हमारे पाकिस्तान में भी ऐसे उदाहरण कई बिखरे पड़े हैं। चलिए दिल बहलाने के लिए एक किस्सा सुना देता हूं। जैसे बिहार से गंगा मैया गुजरती है वैसे ही हमारे पंजाब से सिंधु नदी गुजरती है।

इसी सिंधु नदी के किनारे मुजफ्फरगढ़ के इलाके में एक सुस्त पटवारी बहुत समय से जमा हुआ था। कई अफसर आए मगर उसका कभी ट्रांस्फर न कर सके। दस साल बाद एक अफसर ने लालच देते हुए कहा कि हम तुम्हें पटवारी के पद से तरक्की देकर, तहसीलदार बनाकर मुजफ्फरनगर से राजनपुर ट्रांस्फर कर रहे हैं।

पटवारी ने हाथ जोड़ दिए- हुजूर जब मैं तरक्की नहीं करना चाहता तो हर अफसर बार-बार मुझे तरक्की क्यों दिलवाना चाहता है? काश यह किस्सा पहले सुना देता तो मोदी जी बिहार को तरक्की के रास्ते पर डालने की जिद न करते।

गरीब आदमी हो या गरीब राज्य, कभी-कभी बहुत सारे रुपये एक साथ देखकर डर भी जाता है। इमरान खान भी पाकिस्तानियों को बार-बार कह रहे हैं कि चलो मेरे साथ नए पाकिस्तान की ओर।

मगर वोटर हर बार यही कह देता है कि हम पुराने पाकिस्तान में ही ठीक हैं।वैसे अब तक कराची के औरंगीटाउन में रहने वाले लाखों बिहारियों में से किसी एक ने भी पटाखा नहीं फोड़ा। आज्ञा दीजिए, मैं जरा जाकर कारण मालूम करता हूं।
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