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खुर्शीद के ट्रस्ट के खिलाफ आरोपों के दस्तावेज तलब

Fri, 19 Oct 2012 08:03 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट में विकलांगों के अनुदान को लेकर कथित फर्जीवाडा़ किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक निजी टीवी चैनल को नोटिस जारी कर 30 अक्टूबर को संबंधित ब्यौरा व पूरे दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति डॉ. सतीश चंद्रा की खंडपीठ ने गुरुवार को यह आदेश एक पीआईएल पर दिया। याचिका में मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराए जाने व प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
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याची नूतन ठाकुर की तरफ से अधिवक्ता अशोक पांडेय का कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार मामले में एफआईआर दर्ज कराए बगैर ही जांच करा रही है, जो उचित नहीं है। वकील पांडेय ने बहस में आरोप लगाया कि ट्रस्ट में काफी घपला किया गया और कैग की रिपोर्ट भी कहती है कि इसमें फ्रॉड किया गया है। यहां तक कि हस्ताक्षर भी फर्जी हैं।

राज्य सरकार की तरफ से अपरमहाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने कोर्ट को बताया कि राज्य सराकर मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से करवा रही है। उन्होंने मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिए जाने का भी आग्रह कोर्ट से किया और केंद्र सरकार की तरफ से पीआईएल पर उठाई गई शुरुआती आपत्तियों का समर्थन भी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तनखा ने पीआईएल का विरोध करते हुए इस पर आपत्तियां उठाईं। उन्होंने कहा कि पीआईएल चैनल व अखबारी खबरों पर आधारित है, जो कैजुअल ढंग से व्यक्ति विशेष की छवि धूमिल करने व स्कैंडल खड़ा करने की नीयत से दायर की गई हैं। केंद्र के वकील ने आरोप लगाया कि यह एक छद्म पीआईएल है, जो महज सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए दायर की गई है। ऐसे में यह खारिज किए जाने योग्य है।

अदालत ने मामले की शुरुआती सुनवाई के बाद इसमें पक्षकार बनाए गए एक टीवी न्यूज चैनल के संपादक को नोटिस जारी कर संबंधित पूरे दस्तावेज 30 अक्टूबर को कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसी चैनल ने इस  मामले में स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसके आधार पर याची ने यह पीआईएल दायर की है।

मेरठ से बैरंग लौटी ईओडब्ल्यू टीम   
केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा लगाए गए विकलांग शिविर की जांच करने जिला विकलांग कल्याण विभाग के दफ्तर में पहुंची ईओडब्ल्यू की टीम को बैरंग लौटना पड़ा, चूंकि वहां मौजूद वर्तमान अधिकारी और कर्मचारियों ने पुराने अधिकारी और कर्मचारियों के पास ही कागजात होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि विभाग में शिविर से संबंधित कोई कागजात नहीं है। उन्होंने बताया कि पूर्व अफसर और लिपिक को इस संबंध में पत्र भेजकर ट्रस्ट के शिविर संबंधी रिकॉर्ड मांगा गया है। पुराने लिपिक का तबादला बागपत और विकलांग कल्याण अधिकारी का तबादला बुलंदशहर हो चुका है।
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