अगर आपको इलाके का एक भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो आप चार नवंबर को पोलिंग बूथ पर जाएं और नियम 49-ओ का प्रयोग करें। 49-ओ के तहत आप वोट दर्ज करवाते हैं तो यह वोट किसी भी उम्मीदवार के खाते में नहीं जुड़ेगा। निर्वाचन आयोग के चुनाव नियम 1961 की धारा 49-ओ का प्रयोग प्रत्याशी को रिजेक्ट करने के लिए होता है। इसके तहत किसी उम्मीदवार को आपका वोट जाने की बजाय चुनाव आयोग के रजिस्टर में दर्ज हो जाएगा।
ऐसे में प्रत्याशियों की नापसंदगी का दुख सिर्फ घर पर बैठकर नहीं मनाएं। मतदान केंद्र में जाकर अपने मत का प्रयोग करें तथा सियासी दलों को साफ छवि और कर्मठ प्रत्याशियों को चुनाव में उतारने के लिए विवश करें। इसके लिए मतदाता को संबंधित बूथ पर जाकर तैनात पीठासीन अधिकारी से इस अधिकार के प्रयोग के लिए कहना पड़ेगा। पीठासीन अधिकारी वोटिंग रजिस्टर में बाकायदा मतदाता से जुड़े तथ्यों की एंट्री करेगा। उसके अंगूठे का निशान या हस्ताक्षर भी लेगा।
नियम के प्रति कम जागरूकता
चुनाव से जुड़े नियम 49-ओ को लेकर कम ही मतदाता जागरूक हैं। लिहाजा, चुनावों में बेहद कम लोग इसका प्रयोग करते हैं। मतदाताओं में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने भी कोई सराहनीय कदम नहीं उठाया है।
2007 के चुनाव में नहीं हुआ प्रयोग
प्रदेश में साल 2007 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान एक भी मतदाता ने नियम 49-ओ का प्रयोग नहीं किया। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर इसका उल्लेख किया गया है।
भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कारगर औजार
भ्रष्ट एवं आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से बाहर करने का यह बहुत कारगर औजार हो सकता है। यदि जनता तय कर ले कि सभी अवांछनीय लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाए तो बड़े पैमाने पर लोग सभी उम्मीदवारों को खारिज करने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। राजनीतिक दल भी फिर इस डर से कि कहीं जनता उनके उम्मीदवारों को नकार न दे, सही लोगों को उम्मीदवार बनाना शुरू करेंगे।
पंजाब, यूपी के लोग हुए जागरूक
पंजाब और उत्तर प्रदेश में इस साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों राज्यों के लोगों ने नियम 49-ओ का प्रयोग किया है। पंजाब में 439 मतदाताओं तथा उत्तर प्रदेश में पांच हजार 364 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को वोट देने के बजाय नियम 49-ओ का प्रयोग कर अपना नाम चुनाव आयोग के रजिस्ट्रर पर दर्ज कराया है।
सभी मतदान केंद्रों में की व्यवस्था: उपायुक्त
जिला निर्वाचन अधिकारी और उपायुक्त शिमला डॉ. अरुण कुमार शर्मा का कहना है सभी मतदान केंद्रों में चुनाव आयोग के अधिनियम 1961 की धारा 49-ओ के तहत किसी भी उम्मीदवार को मत नहीं दिए जाने की सुविधा दी जाएगी।