गांव सावरखेड़ा में प्रेम विवाह करने वाले युगल को दो साल तक गांव से बाहर रहना होगा। गांव की पंचायत ने दोनों को यह सजा सुनाई है। यह चेतावनी भी दी है कि दो साल से पहले वे गांव में घुसे तो खैर नहीं होगी। पंचायत के फैसले के खिलाफ प्रेमी युगल थाना हाफिजगंज पहुंचा, लेकिन पुलिस ने भी पंचायत के फैसले पर मोहर लगा दी। आखिर बुधवार को उन्हें गांव छोड़कर जाना पड़ा। ममाला उत्तर प्रदेश के बरेली का है।
गांव सावरखेड़ा में पंचायत का यह फैसला तब सुनाया है, जब बुलंदशहर के अब्दुल हाकिम की ऑनर किलिंग का मामला लखनऊ से दिल्ली तक गूंज रहा है। गांव में रहने वाले मोहम्मद नवी के बेटे अहमद नवी और महबूब की बेटी परवीन ने करीब महीना भर पहले घर से भागकर निकाह कर लिया था। परवीन के घरवालों की शिकायत पर पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की।
अहमद और परवीन को इस बारे में पता लगा तो आठ-दस दिन बाद ही दोनों थाने आ गए। दोनों के बालिग होने के कारण पुलिस ने तो कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन उनके थाने आने की खबर मिलने के बाद गांव में पंचायत बैठी। ग्राम प्रधान अशफाक अहमद के अलावा इसमें दोनों पक्षों के लोग भी बैठे। पंचायत ने अहमद नवी और परवीन को 1 जनवरी 2015 तक गांव से बाहर रहने का फैसला सुनाया।
अहमद नवी के परिवार वालों ने विरोध जताया, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। अहमद और परवीन इसके बाद दिल्ली चले गए। 26 नवंबर की शाम अहमद परवीन को लेकर घरवालों से मिलने गांव पहुंचा तो तनाव फैल गया। परवीन के चाचा मुश्ताक और भाई आरिफ ने हाफिजगंज पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने परवीन और अहमद के साथ उनके घरवालों को भी थाने बुला लिया।
बीडीसी सदस्य अबरार अहमद, मोहम्मद तसलीम, शमशुल हसन, मोहम्मद नवी आदि गांव के लोगों की मौजूदगी में फिर पंचायत हुई। तय हुआ कि अहमद नवी और परवीन को पंचायत का फैसला मानना ही पड़ेगा। पुलिस ने भी पंचायत के फैसले का समर्थन करते हुए दोनों को दो साल तक गांव से बाहर रहने का फरमान सुना दिया। मायूस होकर अहमद नवी और परवीन थाने से ही दिल्ली चले गए।
हाफिजगंज के कार्यवाहक थाना प्रभारी हरगोविंद का कहना है कि अहमद नवी और परवीन के निकाह करने से गांव में तनाव था। इस तनाव को खत्म करने के लिए ही दोनों को पंचायत का फैसला मानने को कहा गया है।