वीआईपी अपना दौरा कर चले गए, रोडवेज घाटे का गुबार देखता रह गया। रोडवेज की टैक्सियों का इस्तेमाल कर भुगतान न करने वालों की फेहरिस्त में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का नाम भी शामिल है। महामहिम और पूर्व मुख्यमंत्री पर रोडवेज का लाखों रुपए बकाया है। परिवहन निगम का सबसे बड़ा बकायेदार पुलिस महकमा है। विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक बकाया राशि मिल जाए तो रोडवेज की माली हालत काफी हद तक सुधर सकती है।
सत्कार में लगती हैं रोडवेज की टैक्सियां
प्रदेश के राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री, मंत्री, बड़े अफसरों समेत वीआईपी आदि के आगमन पर उनके दौरे के लिए रोडवेज की टैक्सियां लगाई जाती हैं। उनके बिलों का भुगतान संबंधित सरकारी विभाग से लिया जाता है।
परिवहन निगम के प्रवक्ता अजय श्रीवास्तव ने कहा कि परिवहन निगम के द्वारा प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री एवं वीआईपी अफसरों के आगमन के दौरान उनके दौरे के लिए टैक्सी मुहैया कराई जाती है। इन टैक्सी में वीआईपी की सुरक्षा में चलने वाले जवान सफर करते हैं। ऐसी टैक्सियों का भुगतान गृह विभाग के द्वारा किया जाता है। लेकिन भुगतान के ये बिल काफी दिनों से लंबित हैं।
इनका इतना है बकाया
पिछले पांच सालों के दौरान राज्यपाल बीएल जोशी के आने पर प्रयोग में लगाई गई रोडवेज टैक्सियों का 32 लाख 34 हजार रुपए के बिल का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। बसपा सरकार चली गई लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के प्रोटोकाल का 5 लाख 90 हजार रुपए बकाये का अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है।
पुलिस विभाग पर सबसे ज्यादा बकाया
सबसे ज्यादा 95 लाख 50 हजार रुपए का बकाया पुलिस विभाग पर है। जो पिछले पांच-छह सालों से चल रहा है। इसके अलावा और भी कई विभाग हैं जो कई सालों से रोडवेज का बकाया नहीं चुका पाए हैं।
गाजियाबाद रीजन के आरएम एसके शर्मा का कहना है कि भुगतान के लिए कई बार संबंधित विभागों को लेटर भेजे गए हैं। बार-बार रिमाइंडर भी कराया जाता है। लेकिन अभी तक पेंडिंग पड़े बिलों की राशि नहीं मिल पाई है।