राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक बार फिर भ्रष्टाचार को देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा बताया है।
सीबीआई पर राजनीतिक इस्तेमाल के लग रहे गंभीर आरोपों के बीच जांच एजेंसी के स्वर्ण जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि देश नए दौर के हिसाब से बदलाव को तैयार नहीं है और यही प्रशासन की खामियों की मुख्य वजह है।
राष्ट्रपति ने कहा कि बढ़ता भ्रष्टाचार देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा बन चुका है। यह लोगों के विकास तथा उनमें समानता के लिए किए जा रहे कार्यों को बेअसर कर सकता है।
मुखर्जी ने कहा कि पिछले कुछ समय में सरकारी कामों में पारदर्शिता के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ 2011 में हुए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के सुझावों पर भी अमल के लिए सरकार ने कई फैसले लिए हैं।
भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का सदस्य बनने के साथ ही विदेशों में भी घूस लेने संबंधी कानून बनाया है। यही नहीं, निजी क्षेत्र में घूसखोरी रोकने को भी कानूनी उपाय किए जा रहे हैं।
उन्होंने दिल्ली गैंगरेप के बाद युवाओं के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना से पूरा देश आहत हुआ था। राष्ट्रपति ने कहा कि इस समय हमें अपने नैतिकता के पैमानों को बदलने की जरूरत है।
मुखर्जी ने जोर दिया कि सामाजिक बदलाव के लिए उचित माहौल तैयार करने में पुलिस तथा जांच एजेंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सक्षम पुलिस फोर्स तथा जांच एजेंसियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि कोई भी अपराधी दंड से न बच पाए। उन्होंने इसके लिए न्यायालयों में जल्द से जल्द फैसले पर भी जोर दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि अच्छे प्रशासन के लिए यह सबसे जरूरी कदम है। इस मौके पर राष्ट्रपति ने सीबीआई अफसरों को डीपी कोहली अवॉर्ड प्रदान किए।