मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनने वाली 38 वर्षीय स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस और मोदी की कट्टर समर्थक मानी जाने वाली मधु किश्वर ने भी मोदी के ईरानी को मंत्री बनाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने कहा कि मोदी सरकार की ये कैसी कैबिनेट है। शिक्षा मंत्री ग्रेजुएट तक नहीं हैं। वहीं मधु किश्वर ने ट्विटर पर लिखा है कि स्मृति ईरानी बी कॉम फर्स्ट ईयर पास होने का दावा करती हैं, लेकिन ऐसी कोई डिग्री नहीं है।
मोदी के इस फैसले पर सवाल उठाए
यानी उन्होंने बस एडमिशन लिया और पढ़ाई छोड़ दी। शपथ पत्र में गलत जानकारी दी गई। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर भी ईरानी को मंत्री बनाने को लेकर जबरदस्त आलोचना हो रही है।
ईरानी के 12वीं पास होने की बात को लेकर कई यूजर्स ने नरेंद्र मोदी के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।
स्मृति ईरानी मोदी कैबिनेट में सबसे युवा मंत्री हैं। अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव हारने के बावजूद उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें मोदी का करीबी माना जाता है। वह अभी राज्यसभा से सांसद हैं।
वहीं नए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस द्वारा ईरानी पर शैक्षिक योग्यता के आधार पर निशाना साधे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उसे इसके बजाय अपनी गिरेबां में झांकना चाहिए। ईरानी की योग्यता को सारा देश जानता है और इसे ध्यान में रखते हुए ही उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस ने ली चुटकी
सोशल वेबसाइटों पर मुद्दा उछलने के बाद कांग्रेस ने भी जलती आग में घी डालने का काम किया। पार्टी प्रवक्ता अजय माकन ने कहा कि देश का शिक्षा मंत्री ग्रेजुएट तक नहीं है।
इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा। माकन ने मंत्रिमंडल में दस राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर भी सवाल उठाए। साथ ही पूर्णकालिक रक्षा मंत्री नहीं मिलने को लेकर भी मोदी पर निशाना साधा
मोदी की करीबी किश्वर ने उठाए सवाल
मोदी की नीतियों की बड़ी पैरोकार रहीं पत्रकार और लेखिका मधु किश्वर ने ट्विटर पर लिखा कि स्मृति ईरानी 12वीं पास हैं। वह मॉडल बनने आईं और टीवी सीरियल में बहू बन गई। क्या भारत का शिक्षा मंत्री बनने के लिए यही योग्यता है।
हैरानी नहीं होगी अगर स्मृति ईरानी को असाधारण प्रतिभा को मान्यता प्रदान करते उप प्रधानमंत्री बना दिया जाए। मौजूदा शैक्षणिक अव्यवस्था से भारत को आगे ले जाने के लिए अलग नजरिए की जरूरत है।