त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया कि खुफिया एजेंसियों को 1993 मुंबई विस्फोट के गुनहगार याकूब मेमन के परिजन और दोस्तों को छोड़कर जनाजे में एकत्र हुए सभी लोगों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि उनमें से कई ‘संभावित आतंकवादी’ हो सकते हैं।
राय ने अपने ट्वीट कहा, "खुफिया विभाग को मेमन के जनाजे में आने वाले सभी पर (रिश्तेदार और दोस्तों को छोड़कर) नजर रखनी चाहिए। कई संभावित आतंकी हो सकते हैं।"
Governors ought to be concerned abt security of state. Intelligence keeping tab on Yakub's mourners is preventing terror. Better than cure— Tathagata Roy (@tathagata2) July 31, 2015
उनके इस बयान पर हंगामा हो गया। वाम दलों और तृणमूल ने उन्हें आड़े हाथ लिया है। अपने बयानों के लिए आलोचना झेलने वाले राज्यपाल ने ट्वीट किया, "यह मेरा संवैधानिक दायित्व है कि सार्वजनिक हित के मुद्दे को लोगों के ध्यान में लाऊं। इससे राज्यपाल के तौर पर मेरी हैसियत से कोई समझौता नही हुआ है।"
It is my Constitutional duty to bring matters of public interest to public notice. My position as Governor is not thereby compromised— Tathagata Roy (@tathagata2) July 31, 2015
वाम दलों और तृणमूल ने की आलोचना
बाद में, यहां एक टीवी समाचार चैनल से बात करते हुए राय ने कहा कि उन्होंने मेमन के परिजन और दोस्तों को इससे बाहर रखा है। उन्होंने कहा कि दूसरे लोग ऐसे व्यक्ति को देखने के लिए क्यों आए, जिसे फांसी दी गयी। जरूर उन्हें उससे सहानुभूति रही होगी। राय ने ट्वीट में यह भी कहा, "जब मैंने खुफिया निगरानी का सुझाव दिया, तो मैंने किसी समुदाय विशेष का जिक्र नहीं किया।"
When I suggested 'intelligence keeping a tab',I mentiond NO COMMUNITY. So how come I'm accused of being 'communal bigot'? Guilty conscience?— Tathagata Roy (@tathagata2) July 31, 2015
राय की आलोचना करते हुए दिग्गज वामपंथी और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और उनका बयान संविधान के मुताबिक नहीं है।
चटर्जी ने कहा कि अगर वह सरकार को कोई सलाह देना चाहते हैं तो उन्हें ट्विटर का सहारा नहीं लेना चाहिए। वह राज्य के मुख्यमंत्री से कह सकते थे या वह उन्हें एक संदेश भेज सकते थे। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि राय को याद रखना चाहिए कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं।