पंजाब के मलेरकोटला में कुर्बानी की बकरियों और राजस्थान के टोंक व बुरहान में गायों पर तेजाब फेंक देने जैसी घटनाओं को केंद्र बड़ी बारीकी से भांप रहा है।
इतना ही नहीं संवेदनशील राज्यों में वक्फ बोर्ड की कब्जे वाली जमीनों का लेखा जोखा भी कैबिनेट और गृह सचिव स्तर पर तैयार किया जा रहा है।
केंद्र का मानना है कि कई राज्यों में एक राजनीतिक योजना के तहत सांप्रदायिकता भड़काने की जमीन तैयार की जा रही है।
पिछले हफ्ते कैबिनेट सचिव अजीत सेठ और गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने उन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ छोटी लेकिन अजीबोगरीब घटनाओं का लंबा विश्लेषण किया, जहां ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
गृह मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक यूपी में मुजफ्फरनगर के बाद मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, मथुरा और रामपुर को लेकर खास ध्यान रखने को कहा गया है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश के देवास व भोपाल, राजस्थान के टोंक व बुरहान, पंजाब के मलेरकोटला, बिहार के मधुबनी व दरभंगा और कर्नाटक के कुछ शहरों और ग्रामीण इलाकों में दंगे भड़कने का गंभीर अंदेशा जताया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि स्थानीय खुफिया तंत्र ने इन जगहों से ऐसी घटनाओं का ब्योरा भेजा है, जिससे साफ है कि कोई ताकत सोची समझी साजिश के तहत एक खास समुदाय को भड़काने की कोशिश कर रही है।
ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि कई जगहों पर तनाव बढ़ाने के लिए वक्फ बोर्ड की जमीनों पर जबरन कब्जे को मुद्दा बनाया जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि ऐसी घटनाएं शहरी क्षेत्रों के बजाय उन दूर के इलाकों में की जा रही हैं जहां प्रशासन का सीधे पहुंचना आसान नहीं है। यहां सांप्रदायिक तनाव पैदा करना ज्यादा आसान है।
अधिकारियों के मुताबिक इन राज्यों को गैर शहरी इलाकों में पुलिस की चौकसी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने किसी खास राजनीतिक पार्टी या उससे जुड़ी संस्था का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग इस राजनीतिक साजिश के तहत काम कर रहे हैं उनका प्रयोग मुजफ्फरनगर में बिल्कुल सफल रहा है। उन्होंने शहर में फैले दंगे को गांवों में पहुंचा दिया।