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विरोध के बीच तेलंगाना राज्य का बनना तय

Tue, 30 Jul 2013 12:32 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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केंद्र सरकार से लेकर कांग्रेस और आंध्र प्रदेश तक भारी विरोध के बावजूद अब तेलंगाना राज्य का बनना तय माना जा रहा है। आंध्र प्रदेश के बंटवारे पर मंगलवार शाम कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।
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पार्टी हाईकमान के इस संभावित फैसले के मद्देनजर कांग्रेस नेताओं की बगावत भी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में तेलंगाना के गठन का ऐलान होते ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी समेत कई मंत्री और पार्टी सांसद इस्तीफा दे सकते हैं।

वहीं, सरकार के अंदर रक्षा मंत्री एके एंटनी, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू भी तेलंगाना के गठन का जबरदस्त विरोध कर रहे हैं।
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मगर कांग्रेस हाईकमान और सरकार के कदम अब पीछे हटते नहीं दिख रहे हैं। लिहाजा, बिना देर किए मंगलवार को पार्टी की शीर्ष इकाई कार्यसमिति बैठक बुलाकर तेलंगाना के गठन का ऐलान करने का मन बना लिया गया है।

इससे पहले प्रधानमंत्री मंगलवार को ही यूपीए समन्वय समिति की बैठक में सरकार के घटक दलों को देश के 29वें राज्य के गठन की औपचारिक जानकारी देंगे।

हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की बात है। सूचना प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था के लिहाज से विकसित हो रहे हैदराबाद को आंध्र प्रदेश और नए तेलंगाना राज्य की कुछ सालों के लिए साझा राजधानी बनाने की बात है।

गैर तेलंगाना क्षेत्र यानी रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश के कांग्रेस नेता तेलंगाना राज्य के गठन के पक्ष में नहीं है। सोमवार को भी इनका विरोध जारी रखा है।

इन नेताओं ने हाईकमान को कहा है कि अलग राज्य बनाने से उनके वोट बैंक पर असर पड़ सकता है और उनके हारने तक की नौबत आ सकती है।

मगर हाईकमान ने इन नेताओं को दो टूक कह दिया है कि उनकी मांग नहीं मानी जाएगी। कांग्रेस रणनीतिकार मुख्यमंत्री किरण रेड्डी को भी मनाने का दावा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री से इस्तीफा नहीं देने के लिए कहा गया है। रेड्डी मंगलवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं कांग्रेस के मैनेजरों का आकलन है कि अलग राज्य बनाने से कांग्रेस को ज्यादा चुनावी फायदा होगा।

कांग्रेस का चुनावी गणित
चर्चा है कि 2014 के चुनाव में तेलंगाना क्षेत्र की करीब दस सीटों को सुनिश्चित करने के चलते कांग्रेस बड़ा जुआ खेल रही है। कांग्रेस राज्य का बंटवारा इस तरह से करने की कोशिश में है, जिससे उसे सियासी फायदा हो और उसके विरोधियों को घाटा।

सूत्रों का कहना है कि रायलसीमा के दो जिलों को तेलंगाना क्षेत्र में जोड़ने की तैयारी है। अभी तेलंगाना क्षेत्र में दस जिले हैं। इससे पुराने और नए राज्य दोनों को लगभग 20-20 लोकसभा सीट मिल जाएंगी। अभी प्रदेश में कुल 48 लोकसभा सीटें हैं।

कांग्रेस के मैनेजरों का कहना है कि ऐसा करने से उनके प्रमुख चुनावी प्रतिद्वंद्वी जगन मोहन रेड्डी का राजनीतिक गढ़ दो हिस्सों में बंट जाएगा।

आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती
तेलंगाना के गठन के राजनीतिक फैसले को गृह मंत्रालय देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मान रहा है। मंत्रालय को आशंका है कि तेलंगाना में नक्सली खतरनाक तरीके से अपनी जगह बनाएंगे।

राज्य के सभी मंत्रियों ने हाईकमान को एक पत्र सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि अगर राज्य का बंटवारा किया गया तो वे अपना पद त्याग करेंगे।--टीजी वेंकटेश, आंध्र प्रदेश के मंत्री
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