महंगाई और भ्रष्टाचार के दाग को धोने के मकसद से आर्थिक सुधारों पर जोर-शोर से आगे बढ़ रही सरकार की मुहिम पर कांग्रेस ने मुहर लगा दी है। देश में विदेशी निवेश लाने के लिए सरकार को दांव पर लगाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समर्थन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी को गोलबंद कर दिया है।
सोनिया ने आर्थिक सुधारों पर सरकार का हाथ थामते हुए भाजपा पर ‘नकारात्मक राजनीति’ करने का आरोप लगाया। पीएम के सुर में सुर मिलाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने सुधारों को देश के लिए बेहद जरूरी करार दिया। कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार सुबह दस जनपथ पर हुई बैठक में सोनिया ने ममता बनर्जी के यूपीए से हटने के बाद भी ‘सरकार को कोई खतरा नहीं’ होने की ताल भी ठोकी।
उनका कहना था कि सरकार के साथ नए सहयोगी (सपा-बसपा) जुड़ गए हैं और सरकार स्थिर है। बैठक में सोनिया ने देश के कुछ इलाकों में हाल में पैदा हुए सांप्रदायिक हालातों पर भी चिंता जाहिर की। वहीं प्रधानमंत्री ने अपने फैसलों की जोरदार पैरोकारी करते हुए कहा कि दुनिया भर की आर्थिक मंदी का भारत पर असर न हो, इसीलिए आर्थिक सुधारों के कदम उठाए गए हैं।
इस तरह कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई सीडब्लूसी ने अपनी दूसरी पारी में अब तक लगातार पिट रही यूपीए सरकार की छवि बदलने के लिए शुरू की गई ताजा सुधारों की धुआंधार मुहिम को पार्टी का राजनीतिक कवच पहना दिया है। सरकार के साथ कांग्रेस का नया चेहरा पेश करने के मकसद से ही सोनिया ने यह संदेश देने की कोशिश की, कि प्रधानमंत्री आर्थिक सुधारों का कदम जनता की भलाई के लिए उठा रहे हैं। जबकि भाजपा नकारात्मक राजनीति कर लोगों को गुमराह कर रही है।
कार्यसमिति में वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने एफडीआई रिटेल और अन्य आर्थिक सुधारों का विस्तृत ब्योरा पेश किया। उन्होंने वैश्विक मंदी की चुनौतियों के बीच इन सुधारों से देश की आर्थिक तस्वीर सुधरने का रोडमैप भी दिखाया। उनका आशय साफ था कि देश की आर्थिक तस्वीर बदलेगी तो कांग्रेस की सियासी सेहत भी सुधरेगी। उन्होंने कहा कि देश में ज्यादा पैसा आएगा तो रुपए की कीमत नहीं घटेगी और महंगाई पर काबू पाने में कामयाबी मिलेगी।
सोनिया बोलीं तो सब रहे चुप
बैठक की शुरुआत सोनिया गांधी के संबोधन से हुई। जब सब नेताओं ने देखा कि वह पूरी तरह से मनमोहन सिंह के पक्ष में बैटिंग कर रही हैं तो किसी में महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हो रहे बवाल पर बोलने की हिम्मत नहीं हुई। यहां तक कि किसी ने डीजल मूल्यवृद्धि और रसोई गैस सब्सिडी घटाने के सरकार के फैसले पर भी सवाल नहीं उठाए। चौतरफा विरोध झेल रहे एफडीआई रिटेल पर भी कांग्रेसी नेता चुप रहे।
वहीं उत्साहित प्रधानमंत्री ने बैठक में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन को सही ठहराते हुए कहा कि विदेशी निवेश और सुधारों पर तेजी से आगे बढ़ने से ही सामाजिक कल्याण की योजनाओं के लिए पैसा जुटाया जा सकता है। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो फिर सरकार की तमाम बड़ी सामाजिक योजनाएं चलाना मुश्किल होता।
वैसे, कुछ कांग्रेसी नेता आगामी चुनावों को लेकर जरूर चिंतित दिखे। उन्होंने दबी जुबान में यह मांग की कि जनता को आर्थिक सुधारों के मुद्दे पर समझाने पर विशेष प्रयास जरूरी हैं, क्योंकि महंगाई का हल्ला बहुत है और कुछ राज्यों में आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं। सूत्रों के अनुसार एक वरिष्ठ पार्टी सदस्य ने कहा कि यदि संभव हो तो सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों की संख्या छह से बढ़ाई जानी चाहिए। इन चिंताओं पर पीएम ने कहा कि कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई गरीबों की भलाई के लिए कदम उठाने से प्रयास जारी रखेगी और पार्टी ‘आम आदमी’ के हित की नीतियों को नजरअंदाज नहीं करेगी।