कांग्रेस के बड़े नेताओं पर चुनाव लड़ने का पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भले ही दबाव बढ़ा दिया है। मगर बड़े नेता चुनावी रण में उतरने से लगातार कन्नी काट रहे हैं।
कांग्रेस में राहुल की शैली को लेकर असहज दिख रहे इन सीनियर नेताओं को अपने भविष्य की सुरक्षा की चिंता भी सता रही है।
कई राज्यों में गठबंधन की बजाय अकेले चलने के राहुल के फरमान के चलते भी कांग्रेसी दिग्गजों की रातों की नींद खराब हो गई है। तमिलनाडु में कई बड़े कांग्रेसी नेता तो द्रमुक से गठबंधन के सहारे अपनी नैया पार लगाने की कोशिश में थे।
मैदान छोड़कर भाग रहे नेता
मगर राहुल की ओर से द्रमुक के साथ गठबंधन की पहल नहीं करने से उनके सपनों पर पानी फिर गया है। अब वह कई तरह के बहाने बनाकर मैदान छोड़कर भागने में ही भलाई समझ रहे हैं।
अन्य कई राज्यों के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को भी चुनाव मैदान में जाने में डर लग रहा है।
कांग्रेस के खिलाफ नकारात्मक माहौल होने की बात से भी बड़े दिग्गज सहमे हुए हैं। जबकि राहुल की शैली के चलते वह दूसरे दलों के साथ अपनी सीट बचाने की जुगत भी लगा नहीं पा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जीके वासन ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है।
एके एंटनी की भी ना
चुनाव नहीं लड़ने को लेकर वासन ने कहा है कि चुनाव प्रचार अभियान में देर होने से वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उधर, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के अपनी सीट बदलने की चर्चा जोरों पर है।
चर्चा है कि तिवारी अपनी लुधियाना की सीट बदलकर चंडीगढ़ करवाना चाह रहे हैं।
मगर हाईकमान इसके लिए तैयार नहीं है। चंडीगढ़ से पवन बंसल के लड़ने की बात है। मगर रेल भर्ती घोटाले में नाम आने से उनको टिकट देने के बाद पार्टी पर सवाल उठने की भी बात है। यहां तक कि रक्षा मंत्री एके एंटनी के भी चुनाव नहीं लड़ने की चर्चा है हालांकि वे राज्यसभा सदस्य हैं।
दिग्विजय पहले ही मैदान से बाहर
यूपीए सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले एंटनी सरीखे चेहरों के मैदान में उतरने से पार्टी को चुनाव में बड़ी मदद मिलती। सरकार में तीसरे नंबर माने जाने वाले वित्त मंत्री पी चिदंबरम के भी चुनाव नहीं लड़ने की चर्चा जोरों पर चल रही है।
चिदंबरम ने अभी कुछ दिनों पहले ही नई पीढ़ी को आगे कर उनके जैसे वरिष्ठों के चुनावी मैदान में नहीं उतरने की इच्छा का संकेत दिया था। माना जा रहा है कि चिदंबरम चुनाव लड़ने की बजाय दिग्विजय सिंह की तरह राज्यसभा में जाने के इच्छुक हैं।
चिदंबरम भी नहीं चाहते लड़ना
कहा जा रहा है कि चिदंबरम तमिलनाडु से अपनी शिवगंगा सीट पर बेटे को चुनाव लड़ाना चाहते हैं। मगर तमिलनाडु कांग्रेस में इसे लेकर विरोध के चलते अंतिम फैसला लेने में दिक्कत आ रही है। एक और वरिष्ठ स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद भी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।
वह राज्यसभा सीट के जरिए ही आगे की राजनीतिक पारी खेलना चाहते हैं। दिग्विजय सिंह और मधुसूदन मिस्त्री पहले ही राज्यसभा में सीट पक्की कर सुरक्षित रास्ता अपना चुके हैं।
तमिलनाडु से ही जयंती नटराजन भी चुनाव लड़ने से बच रही हैं। बताया जाता है कि हाईकमान ने जयंती को चुनाव लड़ने पर गौर करने को कहा है। हरियाणा से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर के भी चुनाव नहीं लड़ने की चर्चा चल रही है।
क्यों कतरा रहे वरिष्ठ कांग्रेसी
राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट के अजमेर से मैदान में उतरने को लेकर भी दुविधा है।
कांग्रेस के टिकट पर चुनावी शिकस्त की संभावनाओं को भांप यूपी में जगदंबिका पाल ने पार्टी बदलने का रास्ता चुन लिया है तो मध्य प्रदेश में भागीरथ प्रसाद उम्मीदवारी का ऐलान होने के बाद भी कांग्रेस से किनारा कर चुके हैं।
तमिलनाडु के मामले में द्रमुक से गठबंधन नहीं होना कांग्रेसी दिग्गजों के मैदान से किनारा करने की वजह माना जा रहा है। कांग्रेस अकेले मैदान में है।
यहां तक कि राज्य में ज्यादा प्रभाव नहीं रखने वाली भाजपा ने विजयकांत की पार्टी डीएमडीके, अंबुमणि रामदौस की पीएमके और वाइको की एमडीएमके के साथ गठबंधन में कर रही है।
इस गठबंधन के पास कुल वोटों का 20 फीसदी हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में राज्य से कांग्रेस के दिग्गजों को बिना गठबंधन के जीत की गारंटी नहीं लग रही है।