ललित मोदी मामले में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर नए आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने उनसे इस्तीफे की मांग की है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने वसुंधरा और ललित मोदी के बीच कारोबारी रिश्तों की बात कही है और कहा कि वसुंधरा ने करीब 100 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्ति जिसमें धौलपुर महल शामिल है का निजी इस्तेमाल किया है।
जयराम ने कहा कि इस हेराफेरी में वसुंधरा के पुत्र दुष्यंत भी शामिल हैं। इन लोगों ने ललित मोदी के साथ मिलकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है।
बीजेपी का पलटवार
वहीं कांग्रेस को आरोप साबित करने की चुनौती देते हुए राजस्थान बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस के आरोप गलत हैं और वसुंधरा राजे
के पास केंद्र सरकार की रजामंदी वाले सारे कागजात मौजूद हैं।
वसंधुरा के चुनाव आयोग में संपत्ति के दिए गए ब्योरे को कांग्रेस ने हमले का हथियार बनाया है। वर्ष 2013 में चुनाव आयोग के सामने दिए गए वसुंधरा के शपथपत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा है कि ललित मोदी के साथ राजे के कारोबारी लेनदेन के रिश्ते हैं। पार्टी का कहना है कि राजे का इस्तीफा अब नहीं होगा तो कब होगा।
पार्टी का दावा है कि राजे के सामने अपने बचाव में कहने को कुछ नहीं है। ललित मोदी के साथ लेनदेन के उनके रिश्ते सार्वजनिक हो गए हैं। राजे के शपथपत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा है कि दुष्यंत सिंह के साथ ललित मोदी से हुए लेनदेन में राजे को भी फायदा हुआ है। राजे ने खुद अपने शपथपत्र में स्वीकार किया है कि उनके पास मोदी की नियंत हेरिटेज होटल प्राइवेट लिमिटेड के 10 रुपये के अंकित मूल्य के 3280 शेयर हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि राजे ने ये शेयर ललित मोदी के साथ दुष्यंत की लेनदेन के बाद हासिल किए हैं। पार्टी का दावा है कि 96 हजार से अधिक प्रति शेयर की कीमत के हिसाब से वसुंधरा के शेयर की कीमत 31 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। इससे साफ है कि ललित मोदी के जरिये वसुंधरा को बड़ा आर्थिक लाभ मिला है।
राजे भी हैं मालकिन
नियंत हेरिटेज होटल प्रा. लि.वही कंपनी है जिसमें ललित मोदी ने 11.60 करोड़ का निवेश किया है।
शपथ पत्र में राजे ने खुद कहा है कि वे इस कंपनी की एक तिहाई की मालकिन हैं। 2014 के शपथ पत्र में कहा गया है कि दुष्यंत सिंह के पास कंपनी के 3250 शेयर, वसुंधरा की बहू निहारिका सिंह के 3250 शेयर और वसुंधरा राजे के 3280 शेयर हैं।
800 के आसपास ललित मोदी के शेयर हैं। राजे के शपथपत्र का दस्तावेज सामने आने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उनके बचाव में भाजपा को एक-एक कर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।