नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक महिला की जासूसी कराए जाने के आरोपों की जांच के संकेतों के बीच कांग्रेस दोबारा सक्रिय हो गई है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात करने के बाद गुजरात के कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में जासूसी का खेल अभी भी जारी है और हर महीने करीब 93 हजार कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सिर्फ महिला ही नहीं बल्कि उसके माता पिता की भी जासूसी कराई गई है। कांग्रेस पर गरीबी बढ़ाने के मोदी के आरोपों पर भी पार्टी ने जवाब दिया है कि वह झूठ के सहारे दिल्ली की कुर्सी हथियाना चाहते है, जबकि असलियत में उनके लिए दिल्ली अभी बहुत दूर है।
कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि जासूसी मामले में आरटीआई के तहत नई सूचना हासिल की गई है।
इनके मुताबिक 21 अप्रैल 2005 को जब वहां के तत्कालीन पुलिस निदेशक को इतने व्यापक स्तर पर फोन टैपिंग के बारे में पता लगा तो उन्होंने मामले में दिशा निर्देश बना दिए, ताकि लोगों की निजता का उल्लंघन न हो।
कांग्रेस का आरोप है कि गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह ने इन दिशा निर्देशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
वहीं गुजरात के कांग्रेस नेता शक्ति सिंह ने कहा कि यह जासूसी मामला तीन राज्यों से जुड़ा मामला है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में कई लोगों की फोन टैपिंग की गई। उन्होंने केंद्र से जांच करवाने की मांग हो।
साथ सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से जांच करवाने की भी अपील की। दीक्षित ने कहा कि जांच के मुद्दे पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित आयोग को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बचाओ आयोग करार दिया।