महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में पेश आदर्श हाउसिंग घोटाला मामले की जांच रिपोर्ट खारिज कर दी है। रिपोर्ट में तीन मुख्यमंत्रियों समेत कई नेताओं द्वारा कानूनी प्रावधानों का ‘घोर हनन’ किए जाने की बात कही जा रही है।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जेए पाटिल की अगुवाई वाले दो सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट का लंबे समय से इंतजार हो रहा था। वहीं, भाजपा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की तरह सच्चाई को दफन करने की कोशिश करार दिया है।
रिपोर्ट में घोटाले के लिए राज्य के बड़े नेताओं और नौकरशाहों को जिम्मेदार बताया गया है। इसमें घोटाले को ऐसी ‘खराब परंपरा’ बताया गया है जिसमें ‘लालच, भाई-भतीजावाद और पक्षपात’ नजर आते हैं।
पैनल ने आदर्श सोसायटी के कुल 102 सदस्यों में 25 को अयोग्य और फ्लैटों की बेनामी खरीद के 22 मामले पाए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आदर्श सोसायटी को राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों विलाराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और अशोक चव्हाण, पूर्व राजस्व मंत्री शिवाजीराव नलेंगेकर पाटिल, पूर्व शहरी विकास मंत्री सुनील ततकारे और पूर्व शहरी विकास मंत्री राजेश टोपे का संरक्षण मिलता रहा था।
उल्लेखनीय है कि अशोक चव्हाण मामले में इकलौते पूर्व मुख्यमंत्री थे, जिनके खिलाफ सीबीआई ने आरोपपत्र तैयार किया था। मगर, कुछ दिन पहले ही राज्यपाल ने मामले में अशोक चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इंकार कर दिया था।
आयोग की यह रिपोर्ट 18 अप्रैल को अपनी अंतिम रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार को सौंपी थी। मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने विधानसभा में शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन जांच रिपोर्ट के साथ मामले में अब तक की कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश की।