चुनावों में कड़ी राजनीतिक टक्कर दे रहे नरेंद्र मोदी की काट के लिए कांग्रेस भाजपा के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की शरण में गई है। दरअसल कांग्रेस ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अटल बिहारी वाजपेयी का फोटो लगाया है।
कांग्रेस ने अटल के फोटो के जरिए मोदी को राजधर्म के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की है। नो बडी रिमाइंड बीजेपी फॉर इट्स राजधर्म के नाम से छपे इस आर्टिकल से कांग्रेस ने मोदी की योग्यता पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस ने लोगों से सवाल पूछा कि जिस व्यक्ति को अटल बिहारी वाजपेयी ने मुख्यमंत्री पद के योग्य नहीं समझा क्या आप देश का भविष्य उस व्यक्ति के हाथ में दे सकते हैं?
गुजरात दंगों से फिर निशाने पर मोदी
इस लेख में कांग्रेस ने अटल बिहारी के कार्यकाल की तारीफ करते हुए लिखा कि भाजपा में उनके कद का नेता अभी तक नहीं हुआ है। लेख में लिखा गया है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने 2004 में खुद माना था कि उनकी हार 2002 गुजरात दंगों के कारण हुई थी।
कांग्रेस ने इस लेख में अटल बिहारी वाजपेयी के उन लेखों की सीरीज के लिंक दिए हैं जिनमें उन्होंने मोदी को दंगा पीड़ितों की हर संभव मदद करने के लिए कहा था।
वाजपेयी के करीबियों को लगाया ठिकाने!
इसके अलावा पार्टी के दूसरे नेताओं के सम्मान को लेकर भी कांग्रेस ने बीजेपी पर वार किए। कांग्रेस ने मोदी पर आरोप लगाए कि उन्होंने वाजपेयी के करीबियों को भी पार्टी में ठिकाने लगा दिया।
वाजपेयी की भतीजी का जिक्र करते हुए लेख में आरोप लगाए गए कि मोदी ने करुणा शुक्ला को पार्टी़ छोड़ने पर मजबूर किया। साथ ही जसवंत सिंह को निकाले जाने पर सवाल उठाए।
सुब्रमण्यम स्वामी पर भी निशाना
कांग्रेस ने हाल ही में भाजपा में शामिल हुए जनता दल के नेता सुब्रमण्यम स्वामी का जिक्र किया। लेख में लिखा गया है कि मोदी ने पार्टी में उस नेता को भी प्रमुख जगह दी जिसने 1998 में वाजपेयी की सरकार को गिराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
इससे पहले सुब्रमण्यम स्वामी कांग्रेस पार्टी और यूपीए की अध्यक्षा सोनिया गांधी पर कई गंभीर आरोप लगाते रहे हैं।
मुद्दों पर अटल की बुराई लेकिन प्रचार में सहारा
कांग्रेस बेशक चुनाव प्रचार, रैलियों और टीवी डिबेट में वाजपेयी सरकार को नकारते हुए अपने दस साल के कार्यकाल को बेहतर बता रही हो। लेकिन मोदी की काट के लिए अटल का जमकर इस्तेमाल भी कर रही है।
इससे पहले भी कई मौके पर कांग्रेस के बड़े नेता मोदी पर निशाना साधते हुए अटल बिहारी वाजपेयी की सार्वजनिक तौर पर तारीफ करते रहे हैं। ये लेख भी उसी का एक हिस्सा है?