तुष्टिकरण की राजनीति करने के भाजपा और नरेंद्र मोदी के सियासी हमलों से बेपरवाह कांग्रेस ने मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए कानूनी रास्ते का सहारा लेने का वादा किया है।
अल्पसंख्यक आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की लगी रोक के बीच कांग्रेस ने कहा है कि सर्वोच्च अदालत से इस मसले का समाधान नहीं निकलेगा तो पार्टी सत्ता में आने पर इसके लिए जरूरी कानून बनाने का रास्ता अख्तियार करेगी।
पार्टी ने पिछड़े अल्पसंख्यकों को केंद्र सरकार की नौकरियों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों में भी साढे़ चार फीसदी आरक्षण देने के यूपीए वन सरकार के फार्मूले को ही दोहराया है।
ध्रुवीकरण की सियासत को कांग्रेस ने दी हवा
आम चुनाव अभियान के बीच अल्पसंख्यक आरक्षण के ठंडे विवाद को गरमा कांग्रेस ने परोक्ष रूप से ध्रुवीकरण की सियासत को हवा दे दी है।
इस चुनाव की बहस को अब तक धर्मनिरपेक्षता बनाम कट्टरता बनने से रोकने में काफी हद तक कामयाब रहे मोदी को इस बहस में घेरने के लिहाज से भी कांग्रेस के कदम को अहम माना जा रहा है।
पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के धार्मिक आधार पर आरक्षण देने के फैसले पर लगी रोक के बावजूद अपने घोषणापत्र में इसे शामिल किया है। जबकि सैद्धांतिक तौर पर कांग्रेस अमूमन अदालत के विचाराधीन मामलों में विवादित घोषणाएं करने से बचती रही है।
कांग्रेस लोगों को बना रही मूर्ख: भाजपा
इस मसले पर अपनी प्रतिबद्धता जताने के लिए घोषणा पत्र में पार्टी ने स्पष्ट कहा है कि पिछड़े अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने के मामले में हम सर्वोच्च न्यायालय में गंभीरता से पैरवी कर रहे हैं। साथ ही पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि उपयुक्त कानून के माध्यम से यह नीति लागू हो।
पार्टी के ऐलान से साफ है कि सर्वोच्च अदालत से इसका हल नहीं निकला तो सत्ता में आने पर कांग्रेस अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने के लिए उचित कानून बनाएगी।
कांग्रेस के इस ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि संविधान के तहत धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं हो सकता है। फिर भी कांग्रेस लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही है, यह वास्तव में धोखाधड़ी है।