वर्ष 2013 में कांग्रेस उपाध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ा इम्तिहान पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव थे।
पांच में से सिर्फ एक छोटे राज्य मिजोरम कांग्रेस के हाथ लगा। राहुल को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाने के कांग्रेस के सपने को इससे जबरदस्त चोट लगी। पूरे साल कांग्रेस का हर दांव खाली गया।
खाद्य सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण, सीधे नगद सब्सिडी, आधार कार्ड समेत कांग्रेस सरकार के तमाम कदम जनता पर प्रभाव नहीं छोड़ पाए। ऊपर से कांग्रेस संगठन में ही नेतृत्व को लेकर भ्रम की स्थिति है।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का वोट बैंक लूट लिया। वहीं नरेंद्र मोदी की चुनौती से निपटने में भी पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस के कई नेता दबे स्वर में कहते है कि इस समय पार्टी पटरी से उतरी नजर आ रही है।
कांग्रेस के कई नेता अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार करते है कि अगर 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथ बाजी लगती है तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।
आम चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन को लेकर पार्टी के नेता आशंकित है। राहुल संगठन को मजबूत करने के लिए कई नए कदम उठा रहे हैं। मगर इसे लेकर पार्टी नेताओं में नेतृत्व को लेकर भ्रम बढ़ रहा है।
साथ ही अगले साल पार्टी के सामने क्या बड़े मुद्दे होंगे, इसे लेकर भी जबरदस्त उलझन है। स्थिति यह आ गई कि पार्टी दूसरी पार्टियों के एजेंडे को फॉलो करने में लगी है।
आम आदमी पार्टी के टिकट बंटवारे की प्रक्रिया हो या फिर चुनाव घोषणा पत्र बनाने का तरीका। इन मसलों पर राहुल केजरीवाल को कॉपी करते दिख रहे हैं। जबकि बड़े वादे को कानून की शक्ल देने के बावजूद पार्टी को इसका फायदा नहीं मिल रहा है।
पार्टी की आंतरिक रिपोर्ट खुद स्वीकार कर रही है कि खाद्य सुरक्षा कानून का जमीनी स्तर पर अमल नहीं हो पा रहा है। यहां तक कि कांग्रेस शासित राज्य भी इसे ठीक ढंग से लागू नहीं कर पा रहे हैं।
जबकि जोर शोर से शुरू की गई सीधे नगद सब्सिडी को लोग भूल गए हैं। भूमि अधिग्रहण कानून को सरकार और कांग्रेस दोनों क्रांतिकारी कदम नहीं बना पाए।
दूसरी पार्टियां यह कानून हाईजेक करने में जुटी हुई हैं। आम आदमी पार्टी एक राजनीति दल के तौर पर नवंबर, 2012 में ही सामने आई थी।
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एक साल में ही आप ने कांग्रेस को ऐसी चोट पहुंचाई कि पार्टी पूरी पटरी से उतरी नजर आ रही है। अब आप लोकसभा चुनाव में भी 300 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रही है।
ऐसे में सिर्फ भाजपा ही नहीं कांग्रेस के लिए भी मुश्किल बढ़ सकती है। जबकि नरेंद्र मोदी पहले से ही कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने में जुटे हुए हैं।