मुजफ्फरनगर में दंगों की आग फिर भड़कने को लेकर कांग्रेस उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना तो साध रही है, लेकिन समाजवादी पार्टी से अपने समीकरणों को देखते हुए राष्ट्रपति शासन की मांग नहीं कर पा रही है।
हालांकि अब पार्टी के रणनीतिकार संसद के शीतकालीन सत्र के बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग को बुलंद करने जा रहे हैं। साथ ही केंद्र सरकार भी इसके लिए सपा सरकार पर दबाव बना सकती है।
प्रदेश के नेताओं ने निजी रूप से भी राष्ट्रपति शासन की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने कहा है कि प्रदेश में शांति के लिए राष्ट्रपति शासन के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है।
मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर कांग्रेस ने नजरें गड़ा रखी हैं। फिलहाल पार्टी का आधिकारिक स्टैंड यह है कि इस सरकार को खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस भी यही बात कह रही है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री कहते है कि यह सरकार इतनी निकम्मी हो गई है कि इसे खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए, मगर राष्ट्रपति शासन के सवाल पर वह कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं।
सपा से ज्यादा बिगाड़ने में परहेज
दरअसल, इसी साल दिसंबर में संसद के शीतकालीन सत्र होने की बात है। ऐसे में पार्टी को सांप्रदायिक हिंसा निरोधी विधेयक जैसे कई सरकारी कामकाज निपटाने के लिए सपा के समर्थन की जरूरत है, इसलिए पार्टी सपा से ज्यादा बिगाड़ने में परहेज कर रही है। मगर संसद सत्र के बाद कांग्रेस ही नहीं बल्कि यूपीए सरकार भी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने का दबाव बना सकती है।