मध्य प्रदेश में भिंड से कांग्रेस का टिकट मिलने के बाद भी डॉ. भागीरथ प्रसाद भाजपा में शामिल हो गए। वह पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर भिंड से चुनाव लड़े थे और बमुश्किल छह हजार वोटों से भाजपा के अशोक अर्गल से हार गए थे।
अब तक भाजपा ने भागीरथ प्रसाद की भिंड से उम्मीदवारी घोषित नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि अशोक अर्गल के स्थान पर भागीरथ प्रसाद को भिंड से भाजपा का टिकट मिल सकता है।
अशोक अर्गल से जब अमर उजाला ने जानना चाहा कि क्या भागीरथ प्रसाद को भिंड से चुनाव लड़ाया जाएगा या कहीं और से तो उन्होंने कहा कि यह सवाल प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूछा जाना चाहिए।
पहले से थे संपर्क में
भाजपा सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे भागीरथ प्रसाद कांग्रेस का टिकट मिलने के पहले ही वरिष्ठ भाजपा नेताओं के संपर्क में थे। सूत्रों का कहना है कि तोमर और शिवराज मंत्रिपरिषद के सदस्य लालसिंह आर्य पहले से ही भागीरथ प्रसाद के आपरेशन को अंजाम दे रहे थे।
कांग्रेस के नेता इसे भाजपा की ‘पोचिंग’ (लालच देकर शिकार फंसाना) और डर्टी ट्रिक्स बता रहे हैं। भागीरथ प्रसाद के अचानक भाजपा में आने से जहां कांग्रेस की स्थिति शर्मिंदगी और हताशा भरी हो गई है, वहीं भाजपा के अशोक अर्गल की स्थिति डांवा डोल हो गई है।
प्रदेश की राजनीति में अर्गल को तोमर का आलोचक माना जाता है। कई मौकों पर वह तोमर की मुखालफत खुलकर करते रहे हैं। भागीरथ प्रसाद के करीबियों का भी मानना है कि टिकट मिलने के बाद कोई नेता बिना किसी पूर्व शर्त के क्यों पार्टी बदलेगा।
शिवराज से थे प्रभावित
जाहिर है कि भागीरथ प्रसाद ने भिंड से टिकट मिलने के आश्वासन के बाद ही कांग्रेस छोड़ी है। भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेयी का कहना है कि यह भाजपा के बढ़ते हुए प्रभाव का संकेत है, इसमें कोई सौदेबाजी नहीं हुई है।
भागीरथ प्रसाद के भाजपा में आने के पहले राकेश सिंह चतुर्वेदी भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए हैं। उनके भाई मुकेश चतुर्वेदी भाजपा के विधायक चुने गए हैं। ग्वालियर क्षेत्र में कांग्रेस को लगातार खराब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस पशोपेश में..
राकेश चतुर्वेदी के अब मुरैना से लोकसभा का चुनाव लड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ग्वालियर क्षेत्र में भाजपा की राजनीति प्रदेश अध्यक्ष तोमर के प्रभाव में है। उनके अन्य विरोधी माने जाने वाले नेता या तो चुनाव हार गए हैं या प्रदेश के बाहर भेज दिए गए हैं।
कप्तान सिंह सोलंकी को राजस्थान का प्रभारी बनाकर भेजा जा चुका है, वहीं अनूप मिश्रा चुनाव हार चुके हैं। अब यदि भिंड से भागीरथ प्रसाद को टिकट मिल जाता है तो अशोक अर्गल के लिए राजनीतिक अस्तित्व का संकट पैदा हो सकता है।