मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाने से कांग्रेस खुद ही झंझट में फंस गई है।
पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ईरानी की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाने से सहमत नहीं हैं तो भाजपा की ओर से सोनिया गांधी की शैक्षिक योग्यता का प्रमाणपत्र मांगने से पार्टी और असहज पड़ गई है।
बुधवार को पार्टी ने अपने आरोपों की दशा और दिशा बदल कर शब्दों को बदलने में ही भलाई समझी। पार्टी ने बुधवार को कहा कि उसका इरादा किसी पर निजी हमले करने का नहीं था।
नेताओं के अलग अलग राग
पार्टी सिर्फ ये बात कह रही है कि ईरानी की ओर से 2004 और 2014 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में अलग अलग जानकारी दी है जोकि कानूनी रूप से गलत है।
पार्टी ने साथ ही यह भी याद दिलाया कि पूर्व में इस मंत्रालय का कार्यभार मौलाना आजाद, फखरुदीन अली अहमद, वीपी सिंह और एमएम जोशी समेत कई बड़ी हस्तियों के पास रह चुका है।
सवाल उठाना पड़ा भारी
कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष अजय माकन की ओर से ईरानी की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाना पार्टी को भारी पड़ा। पूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि किसी पर निजी हमला नहीं करना चाहिए। हमारा ध्यान सरकार की नीतियों पर होना चाहिए।
उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माखन लाल फोतेदार ने कहा कि किस को मंत्री बनाना है। किसको नहीं। ये प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता है। इसे लेकर मुद्दा बनाना ठीक नहीं है।
दिग्विजय और माकन ने उठाए सवाल
जबकि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी कहा कि प्रधानमंत्री ने मुरली मनोहर जोशी की जगह स्मृति ईरानी को मंत्री क्यों बनाया, इसका जवाब वे क्या दें। ये प्रधानमंत्री का अपना अधिकार है।
इसके बाद शाम को कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हम नियम और सिद्धांत की बात कर रहे हैं। हमारा मकसद किसी पर निजी हमला करना नहीं है।
वहीं उमा भारती ने कहा है कि सोनिया गांधी को अपनी शैक्षिक योग्यता का प्रमाण देना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सोनिया गांधी को सरकार ने मानव संसाधन मंत्री नहीं बनाया जो वे अपनी शैक्षिक योग्यता बताए।