एनडीए से नाता तोड़ने के बाद कांग्रेस जदयू से दोस्ती करने की इच्छा तो रखती है मगर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती है।
सोमवार को कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह बिहार के घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए है।
मगर अभी इस मसले पर निश्चित रूप से कुछ कहना उसके लिए जल्दबाजी होगी।
साथ ही जदयू पर डोरे डालते हुए पार्टी ने फिर दोहराया है कि वे समान और सेक्युलर विचारधारा वाली पार्टियों को आगे लेकर जाना चाहती है।
पार्टी ने कहा है कि बिहार में वह बड़ी भूमिका अदा करेगी।
एनडीए से रिश्ता तोड़ते ही जदयू पर कांग्रेस ने निगाहें गड़ा ली है। राहुल गांधी खुद कह चुके है कि इस मसले पर पार्टी के बड़े नेता फैसला करेंगे।
जबकि पार्टी के संचार और प्रचार विभाग के अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि नई पार्टियों के साथ गठबंधन के मुद्दे पर एके एंटनी के नेतृत्व में समिति बनी है।
वही इस मसले पर अंतिम फैसला करेगी।
साथ ही उन्होंने कहा है कि एनडीए से जदयू के हटने से देश की राजनीति में दूरगामी असर होगा। पार्टी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाली पार्टियों को आगे लेकर चली है।
दरअसल, जदयू के साथ सियासी समीकरण बैठाने में पार्टी इच्छा तो रख रही है मगर बिहार के राजनीतिक हालात और केंद्र के सियासी धरातल को भी नापने में पार्टी जुटी हुई है।
माकन से जब पूछा गया कि क्या पार्टी नीतीश को सेक्युलर मानती है तो उन्होंने कहा कि कौन सेक्युलर है और कौन नहीं, इसका फैसला एंटनी समिति करेगी।