हिंदू आतंकवाद संबंधी केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान ने राहुल गांधी के कमान संभालने और उनके भावुक भाषण का असर फीका कर दिया है। इससे असजह हुई पार्टी ने मंगलवार को इस विवादित बयान से किनारा कर लिया।
पार्टी प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि कभी-कभी न चाहते हुए भी जुबान से गलती से ऐसे शब्द निकल जाते हैं। कोई जानबूझकर ऐसा बयान नहीं देता। साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म अथवा रंग नहीं होता।
विवादित बयान पर ऐतराज जताते हुए भाजपा ने सोनिया गांधी और पीएम से माफी मांगने और शिंदे को हटाने की मांग की थी। मामले के तूल पकड़ने और हिंदू भावनाओं पर इसके असर को देखते हुए कांग्रेस ने इससे पल्ला झाड़ना ही मुनासिब समझा।
इसके बाद द्विवेदी ने कहा कि आतंकवाद का किसी धर्म से लेना-देना नहीं होता। उनकी पार्टी हिंदू अथवा भगवा आतंकवाद से सहमत नहीं है। जहां तक केसरिया रंग का सवाल है तो उस पर कांग्रेस को आपत्ति कैसे हो सकती है। यह रंग त्याग और बलिदान का प्रतीक है। यह रंग तो देश और कांग्रेस के झंडे में है।
उन्होंने कहा कि इस मसले को यही खत्म कर देना चाहिए। हालांकि केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेताओं ने मंगलवार को भी बयान का समर्थन जारी रखा।
क्या कहा था शिंदे ने
--आरएसएस और भाजपा आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे है। संघ के कैंपों में आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जा रही है।