लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सोमवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया और राहुल गांधी ने इस्तीफे का दांव चल पूरी पार्टी को एक बार फिर अपने पीछे खड़ा कर दिया।
इस्तीफे की पेशकश पर पार्टी के सभी नेताओं ने गांधी परिवार के सामने घुटने टेक दिए।
कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक समिति के सभी सदस्यों ने एक सुर में सोनिया और राहुल से इस्तीफा वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि उनके बिना कांग्रेस आगे बढ़ नहीं सकेगी। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस्तीफे को नामंजूर कर दिया।
प्रधानमंत्री ने ली हार की जिम्मेदारी
कार्यसमिति ने एक सुर में कांग्रेस अध्यक्ष से कहा, त्यागपत्र कोई हल नहीं है। आगे की चुनौती से निपटने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए, ये आप तय करें। उसके बाद कार्यसमिति ने एक प्रस्ताव पारित किया।
सोनिया और राहुल से इस्तीफा नहीं देने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री ने खुद हार की जिम्मेदारी ली और खुद को महंगाई और भ्रष्टाचार पर काबू नहीं करने का जिम्मेदार भी ठहरा दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के इस्तीफे की पेशकश पर अजित जोगी, गुलाम नबी आजाद और अनिल शास्त्री ने सबसे पहले खड़े होकर विरोध किया। इन सभी ने कहा कि सोनिया जी आपके बिना कांग्रेस का कोई वजूद नहीं है।
एक सुर में किया सभी ने इस्तीफे का विरोध
आप छोड़कर चले जाएंगे तो हमारा क्या होगा। अंत में सभी ने दोनों के इस्तीफे को एक सुर में नामंजूर कर दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की कमियों की जिम्मेदारी वह खुद लेते हैं।
महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जैसी स्थिति हुई, उस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस्तीफे से समस्या का कोई हल नहीं निकलने वाला है।
पूर्व पटकथा के मुताबिक हाई वोल्टेज ड्रामा दिखा
सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जिसकी उम्मीद थी, वही हुआ। पहले से लिखी पटकथा के मुताबिक बैठक में हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।
सबसे पहले सोनिया और राहुल ने अपना लिखित भाषण पढ़ते हुए इस्तीफे का ऐलान किया तो सभी नेताओं ने कहा, नहीं नहीं, ये हम स्वीकार नहीं करते। इसके बाद हार की जिम्मेदारी लेते हुए कई महासचिवों ने भी इस्तीफे की पेशकश कर दी।
हार के कारणों पर चर्चा नहीं, गांधी परिवार का बखान ज्यादा
हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा होने की बजाय बैठक में सोनिया और राहुल की चुनाव में मेहनत के बारे में ज्यादा बखान हुआ। सरकार की विफलता, चुनाव प्रचार में कामयाब नहीं होना और राहुल की टीम के सदस्यों की नाकामी जैसे बड़े मुद्दों पर कोई बात ही नहीं हुई।
सोनिया ने बैठक में कहा कि मैं महसूस करती हूं कि जो परिवर्तन करना चाहिए वह नहीं कर सकी। मैं हार की जिम्मेदारी लाती हूं। अपना पद छोड़ने की पहल करती हूं।
इसके बाद राहुल ने कहा कि पार्टी में जिस तरह उत्तरदायित्व होना चाहिए था, वह नहीं है। इसीलिए उत्तरदायित्व निभाने की शुरुआत मैं खुद करता हूं और इस्तीफे की पेशकश करता हूं।