रॉबर्ट वाड्रा के बचाव में कांग्रेस फिर उतर गई है। डीएलएफ-वाड्रा सौदे पर हरियाणा के आईएएस अफसर अशोक खेमका की ओर से उठाए गए मुद्दों पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने तर्क दिया है कि खेमका का तबादला पहले हुआ है जबकि उन्होंने यह सौदा बाद में रद्द किया है। इसलिए उनके तबादले से इस सौदे का कोई ताल्लुक नहीं है। कांग्रेस ने यहां तक कहा है कि इस मामले की कोई जांच की भी जरूरत नहीं है।
मालूम हो कि वाड्रा पर अरविंद केजरीवाल की ओर से आरोप ठोकने के बाद कांग्रेस और सरकार के आला मंत्री वाड्रा के बचाव में खुलकर कर उतर गए थे। कई मंत्रियों की ओर से विवादास्पद बयान आने के बाद कांग्रेस को फजीहत का सामना करना पड़ा था। वहीं सरकार की भी काफी आलोचना हुई थी। इसके बाद से कांग्रेस और सरकार में उच्चस्तर पर तय हुआ था कि अब वाड्रा का बचाव नहीं किया जाएगा। मगर हरियाणा के अफसर खेमका का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस को एक बार फिर चुप्पी तोड़नी पड़ी है।
खेमका ने आरोप लगाया है कि वाड्रा और डीएलएफ के सौदे पर सवाल उठाने के चलते उनका तबादला किया गया है। मगर बुधवार को कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि खेमका का तबादला 11 अक्तूबर को हुआ जबकि जमीन के सौदे को लेकर 12 और 15 अक्तूबर को फैसला किया गया है। अल्वी ने कहा कि इससे साबित होता है कि उनका तबादले से इस सौदे का कोई संबंध नहीं है।
अल्वी ने कहा कि हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच समिति बनाई है। यह समिति एक महीने में रिपोर्ट देगी। हरियाणा सरकार ने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद खेमका का तबादला किया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह आरोप सस्ती शोहरत पाने के लिए लगाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वाले इन आरोपों को लेकर न किसी जांच एजेंसी और न ही किसी अथॉरिटी के पास गए हैं।