सांप्रदायिकता के विरोध के नाम पर वामपंथी दलों की छतरी तले जुटे नीतीश कुमार और मुलायम सिंह समेत कई दिग्गजों की मौजूदगी को कांग्रेस अपनी बेहतरी के नजरिये से देख रही है।
देश में तीसरे विकल्प की बात कर रहे इन दलों के नरेंद्र मोदी को एक मंच से कोसने से कांग्रेस की बांछे खिल गई हैं।
दरअसल, पार्टी इस बात से खुश है कि देश में जब महंगाई की मार आम आदमी की खाल उधेड़ रही है और भ्रष्टाचार की शक्ल में कई बड़े घोटाले सामने आ रहे हैं। उस वक्त देश के कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल सांप्रदायिकता के विरोध के नाम पर भाजपा और मोदी के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
यही नहीं, पार्टी का अंदरूनी आकलन है कि ये दल सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता के नाम पर लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद किसी न किसी तरह से कांग्रेस के साथ आ जाएंगे।
इस बात को जेहन में लेकर ही कांग्रेस ने अब मोदी के खिलाफ राहुल गांधी को परोक्ष तौर से अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि देश में 1989 के बाद से जनता मांग कर रही है कि गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री बने। यह सपना 2014 में पूरा होगा।
बुधवार को तालकटोरा स्टेडियम में वामपंथी दलों के झंडे तले जुटे राजनीतिक दलों की एकजुटता को लेकर कांग्रेस सकारात्मक है। पार्टी ने क्षेत्रीय दलों की इस कोशिश पर आक्रामक होने से परहेज किया।
बुधवार को कांग्रेस की यूपीए सरकार के खिलाफ तीसरे मोर्चे बनने और उसमें घटक दल एनसीपी के शामिल होने के सवाल पर पार्टी ने सधा जवाब दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने कहा कि सभी दलों को अपनी बात रखने का अधिकार है। वे कहीं भी अपनी बात रख सकते हैं। पार्टी ने यह बताने की कोशिश की है कि तीसरे विकल्प की बात कर रहे यह दल दरअसल कांग्रेस के रुख का ही समर्थन कर रहे हैं।
राज बब्बर ने कहा कि पार्टी सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ खड़ी हैं। कई सामाजिक संगठन या फिर राजनीतिक दल भी कांग्रेस की चिंता को ही जाहिर कर रहे हैं। पार्टी उनके साथ है।