लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद जहां ज्यादातर राजनीतिक दल हार के मंथन और नए समीकरणों पर सोच-विचार करने में जुटे हैं, वहीं, कई दलों के भीतर आपस में ही घमासान छिड़ गया है।
इस कड़ी में नया नाम कांग्रेस का है। चुनावों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर विरोध के सुर उठने शुरू हो गए हैं। पार्टी के कई नेताओं ने खुलकर कांग्रेस की नीतियों की आलोचना करनी शुरू कर दी है।
गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने हार के लिए राहुल गांधी के सलाहकारों पर निशाना साधा।
टीम राहुल को नहीं था चुनावों का अनुभव
मुंबई की दक्षिण सीट से चुनाव हारने वाले मिलिंद देवड़ा ने अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि कांग्रेस की हार के लिए सिर्फ राहुल गांधी या फिर उनकी लीडरशिप को ही दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हार की वजह राहुल गांधी नहीं बल्कि उनके आसपास मौजूद कुछ लोग थे। मिलिंद का सीधा निशाना राहुल की सलाहकार टीम पर था।
मिलिंद ने कहा कि राहुल गांधी को सलाह देने वाले लोग ठीक नहीं हैं। राहुल की सलाहकार टीम में शामिल लोगों ने उन्हें जमीनी हकीकत से दूर रखा। टीम को चुनावों का कोई अनुभव नहीं था।
उन्होंने कहा कि जो लोग फैसले ले रहे थे, उन्हें चुनावों का कोई अनुभव नहीं था। न ही पार्टी में उनका कोई कद और विश्वसनीयता थी। देवड़ा ने कहा कि इन लोगों ने पार्टी काडर और सांसदों की बात तक नहीं सुनी।
राहुल के समर्थन में उतरे सत्यव्रत चतुर्वेदी
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने इस मसले पर राहुल गांधी का समर्थन किया है। चतुर्वेदी ने इशारों-इशारों में मिलिंद देवड़ा पर ही निशाना साधा है।
सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा, 'जो लोग पहले राहुल गांधी के गीत गाते थे, वही लोग अब राहुल को दोष दे रहे हैं। राहुल ने तो दूसरे दिन ही हार की जिम्मेदारी ले ली थी।
हार के लिए राहुल जिम्मेदार: IUML
केरल और केंद्र में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने लोकसभा चुनाव में मिली हार के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया है।
आईयूएमएल के मुखपत्र ‘चंद्रिका’ के संपादकीय में व्यक्त की गई इस राय पर हालांकि केरल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संपादकीय में कहा गया है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष के अकेले चलने से पार्टी को कोई फायदा नहीं हुआ और वह नरेंद्र मोदी की हवा को समझने में नाकाम रहे।
इसमें कहा गया है कि केवल देशभर में घूमना ही काफी नहीं है। राहुल ने केवल कुछ युवा नेताओं का विश्वास जीता। उन्होंने विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार से सबक नहीं सीखा।
पार्टी में व्यापक बदलाव को समय की जरूरत बताते हुए इसमें कहा गया है कि गलतियों का अवलोकन और आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है। इसमें यह भी कहा गया है कि पूरे प्रचार के दौरान यूपीए के पास भाजपा के नारे ‘अब की बार मोदी सरकार’ जैसा नारा भी नहीं था।