गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सरकार की आर्थिक नीति और रुपये की कमजोर सेहत को लेकर तीखा प्रहार किया है।
अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोदी ने कहा कि यूपीए सरकार और रुपये में गिरने का कंपटीशन चल रहा है।
मोदी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की सेहत तेजी से गिर रही है और कोई दिशा तय करने वाला नहीं है। रुपये का स्तर एक बार 60 तक पहुंच गया और सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है।
उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक द्वारा हाल में उठाए गए कदमों से बुधवार को रुपये में 63 पैसे की रिकवरी हुई। यह डॉलर के मुकाबले एक माह के शीर्ष स्तर 59.13 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
मोदी ने कहा कि जब भारत आजाद हुआ था, तब भी मुल्क की स्थिति आर्थिक रूप से सुदृढ़ थी। लेकिन अब तो ऐसा लगता है कि देश महज एक बाजार बन कर रह गया है।
निर्यात के मुकाबले आयात बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की नीतियों की वजह से असंतुलन पैदा हो गया है। इस वजह से व्यापार घाटा बढता ही जा रहा है।
मोदी ने कहा कि कई लोग हो-हल्ला मचाते हैं कि देश में एफडीआई नहीं आ रहा है। दरअसल सरकार को यह तय करना होगा कि एफडीआई को लेकर कैसी नीति बने जो सभी के लिए लाभप्रद है।
कोई भी निवेशक तभी पूंजी निवेश करता है जब उसे मुनाफे की उम्मीद हो। यदि उसे नुकसान का डर होगा तो वह कतई निवेश नहीं करेगा।
मोदी ने कहा कि लोग मुझसे जल्द आम चुनाव होने की संभावना के बारे में पूछते हैं। जिसके जवाब में मैं कहता हूं, ‘जो सरकार पिछले नौ सालों में कोई निर्णय नहीं ले सकी, वह जल्द चुनाव का फैसला कैसे ले सकेगी।’
मोदी ने कहा कि हर राष्ट्र अपने अच्छे और बुरे दौर से गुजरता है। हम भले ही ऊंचाई पर हों, मगर हमारे देश का नेतृत्व आम आदमी का विश्वास खो चुका है।
प्रधानमंत्री के बयान ‘पैसे पेड़ पर नहीं उगते’ की खिंचाई करते हुए मोदी ने कहा, ‘हम गुजरातियों का मानना है कि पैसे खेतों और कारखानों में पैदा होते हैं, जहां मजदूरों का पसीना बहता है। देश का किसान खेतों में और मजदूर कारखानों में पैसे उगाता है।’
डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरते स्तर पर मोदी ने चुटकी ली कि वह हैरान हैं कि यूपीए और रुपये में नीचे गिरने की होड़ लगी है। उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ था, तब एक डॉलर की कीमत एक रुपये के बराबर थी।
जब अटलजी की सरकार थी, तब यह 42 रुपये पर जा पहुंची और यूपीए सरकार में इसकी कीमत साठ रुपये तक आ गई।
एशिया की तीसरी अर्थव्यवस्था भारत में एफडीआई के आगमन में कमी के बारे में बोलते हुए मोदी ने कहा कि निवेशकों को भारत पर भरोसा नहीं रहा।