कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन भारत को एक और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध करा सकता है। सीमा पर विश्वास बहाली के लिए हुई वार्ता के दूसरे दिन चीन ने भारत की इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाया है।
चीनी सीमा और समुद्री मामलों के महानिदेशक ओयांग यूजिंग ने कहा कि इस मांग पर गंभीरता से विचार हो रहा है।
वर्ष 2006 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ के बीच इस सिलसिले में बातचीत हुई थी। तब अरुणाचल प्रदेश के बमला और लद्दाख के डेमचक से मानसरोवर यात्रा के लिए नया रूट तैयार करने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी थी।
फिलहाल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत के पास उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से ही जाने का एक मात्र रास्ता है।
वार्ता में भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) गौतम बांबावले ने इस मुद्दे को सामने रखा।
उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2006 में चीनी राष्ट्रपति जिंताओ ने भारत के प्रधानमंत्री को इस आशय का आश्वासन दिया था। मगर अध्ययन पूरा होने के बाद भी चीन की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं आया है।
इस पर ओयांग ने कहा कि चीन भारत की इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि चीन कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक और वैकल्पिक मार्ग देने के लिए तैयार है। चूंकि लद्दाख के डेमचक इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों के बीच तनातनी रहती है।
इसलिए चीन की वैकल्पिक मार्ग देने के लिए पहली पसंद अरुणाचल प्रदेश का बमला होगा। दोनों ही वैकल्पिक मार्ग उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर पहुंचने के मार्ग से बेहद आसान हैं।