मैनपुरी में युवती के साथ दुष्कर्म के प्रयास की घटना को लेकर आलीपुर खेड़ा रविवार को फिर सुलग उठा। पकड़े गए युवक को भीड़ ने पीटा और उसे पेड़ से बांधकर जिंदा जलाने का प्रयास किया। कई खोखे फूंक दिए गए। दोनों ओर से पथराव और फायरिंग शुरू हो गई। एसडीएम भोगांव की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। उन्हें बचाने के लिए उनके गनर को फायरिंग करनी पड़ी। पुलिस ने भी फायरिंग कर स्थिति काबू किया। युवक के खिलाफ दुराचार का प्रयास की रिपोर्ट दर्ज तो कर ली गई है, पर पुलिस इसे प्रेम संबंध का मामला बता रही है। तीन उपद्रवी हिरासत में ले लिए गए हैं।
23 जुलाई को भी कस्बे की एक युवती के दूसरे समुदाय के युवक के साथ चले जाने के बाद बवाल हुआ था। तब से ही दोनों समुदायों के बीच तनाव है। ताजा मामला रविवार दोपहर बाद का है। करीब ढाई बजे पास के गांव की दो युवतियां मोबाइल की दुकान पर पहुंचीं। आलीपुरखेड़ा निवासी तसलीम उर्फ बंटी भी एक दोस्त के साथ वहां आया। आरोप है कि उसने एक युवती को दबोच लिया। दुकानदार, दूसरी युवती और अपने साथी को बाहर निकाल कर शटर गिरा लिया। पुलिस का कहना है कि यह सब इन सभी की सहमति से हुआ। लेकिन इसकी भनक पहले आसपास के लोगों फिर दूसरों को लगी। वहां भीड़ जुटने लगी तो बाहर खड़ा दुकानदार और युवक-युवती भाग निकले। लोगों ने शटर उठाया तो भीतर बंटी युवती के साथ आपत्तिजनक अवस्था में मिला। भीड़ ने बंटी की जमकर धुनाई की। जब पता चला कि वह दूसरे समुदाय का है, उसे पेड़ से बांधकर जिंदा जलाने की कोशिश की गई। हालांकि कुछ लोगों के समझाने पर भीड़ मान गई।
घटना की जानकारी मिलते ही युवक के समुदाय के लोग भी जुटने लगे। इसके बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया। वहां आए एसडीएम भोगांव वीके अग्रवाल और पुलिस फोर्स पर भी भीड़ ने जमकर पथराव किया। मोटा रोड और मैनपुरी नाला रोड पर सात खोखे और एक बाइक फूंक दी। उपद्रव रोकने को पुलिस को कई राउंड फायरिंग करनी पड़ी। युवक-युवती को हिरासत में ले लिए गए। डीएम गोविंद राजू एनएस एसपी श्रीकांत सिंह, एडीएम डाक्टर चंद्रभूषण फोर्स के साथ आए। फोर्स ने कस्बे में फ्लैग मार्च भी किया।
कानपुर में सांप्रदायिक संघर्ष, युवक की मौत
कानपुर के भीतरगांव में चोरी के आरोपी एक किशोर की पिटाई से मौत की अफवाह के बाद दो समुदाय के लोग रविवार को आमने-सामने आ गए। सांप्रदायिक संघर्ष में एक युवक की मौत हो गई जबकि दारोगा, कांस्टेबल समेत 12 से अधिक लोग घायल हो गए। एक दर्जन से ज्यादा घर और कई दुकानें-बाइकें फूंक दी गईं। उपद्रवियों ने कस्बे में घूम-घूमकर आगजनी और पथराव किया। घर में मौजूद महिलाओं और लड़कियों से बदसलूकी और लूटपाट भी की गई। डायल 100 की गाड़ी पर भी भीड़ ने हमला बोल दिया। दारोगा समेत कई पुलिसकर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ा। सूचना पर कई थानों की फोर्स ने आते ही मोर्चा संभाला और हवाई फायरिंग शुरू की तो उपद्रवी भाग निकले। पुलिस ने 11 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया है।
भीतरगांव से मिली जानकारी के मुताबिक एक समुदाय के आदमी के घर 1 अगस्त को दिनदहाड़े चोरी हुई थी। 22 अगस्त को उसके भाई ने अपने दूसरे समुदाय के पड़ोसी के किशोर बेटे को पकड़कर पीटकर पुलिस को सौंप दिया। पूछताछ में किशोर ने पुलिस को बताया कि वारदात में उसके साथ गांव का एक और साथी शामिल था। इसके बाद पुलिस ने साथी की निशानदेही पर क्षेत्र के एक ज्वैलर्स की दुकान से चोरी की तीन अंगुठियां बरामद कर ली। पुलिस ने आरोपी किशोर और उसके साथी को अगले दिन नाबालिग बताने पर छोड़ दिया।
लेकिन पहले समुदाय के आदमी और उसके परिवार के बीडीसी सदस्य ने शनिवार शाम दोनों को फिर पकड़ लिया और अपने घर में बंद करके बुरी तरह पीटा जिससे एक की हालत बिगड़ गई। रविवार सुबह कस्बे में उसकी मौत की अफवाह फैल गई। इसी के बाद तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं शुरू हो गईं। भीड़ ने कस्बे स्थित बैट्री की दुकान में आग लगा दी। दुकान के मालिक और उसका बेटा अंदर ही फंस गया। धुएं से दम घुटने में उसकी हालत बिगड़ी और बाद में इलाज के दौरान कानपुर में उसकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही आईजी आशुतोष पांडेय, डीएम डॉ. रोशन जैकब, एसएसपी के. सुनील इमैनुएल भीतरगांव पहुंचे। एसएसपी ने लापरवाही के आरोप में घाटमपुर इंस्पेक्टर राजेश्वर प्रसाद सिंह और चौकी प्रभारी भीतरगांव उदय प्रताप यादव, हेड कांस्टेबल रामप्रकाश, कांस्टेबल मुकेश और कांस्टेबल जगत नारायण को सस्पेंड कर दिया है। सीओ घाटमपुर की जांच कराने को कहा गया है। इधर, एसएसपी ने फायरिंग की बात से इंकार करते हुए कहा कि गांव में तनाव के मद्देनजर भारी पुलिस बल, पीएसी तैनात की गई है।