सुप्रीम कोर्ट ने कोलगेट मामले की जांच में सीबीआई का सहयोग न करने पर केंद्र सरकार को जमकर लताड़ा है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अभी तक मामले में जरूरी दस्तावेज केंद्र की ओर से सीबीआई को नहीं सौंपे गए हैं। साथ ही 164 कोल ब्लॉकों का आवंटन जायज कैसे है, इस पर हलफनामा दाखिल करने के लिए अदालत ने केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया है।
जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 204 कोल ब्लॉक आवंटन के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की 36 बैठकें हुईं। कमेटी के दस्तावेज और मीटिंग के मिनट्स सीबीआई को मुहैया नहीं कराए गए हैं। बिना कागजात के सीबीआई जांच आगे कैसे बढ़ाए?
लगभग तीन घंटे तक तक चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल गुलाम वाहनवती से कहा कि हम बाद में यह न सुनें कि समस्त रिकॉर्ड जलाकर खाक हो गए हैं या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। सभी 36 बैठकों के दस्तावेज तत्काल सौंपे जाएं।
पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कोल ब्लॉक आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
आवंटन प्रक्रिया के बीच में ही दखल करके कोल ब्लॉक हासिल कर लिए गए। लेकिन सीबीआई ने अपने कथन के समर्थन में संबंधित दस्तावेज पेश नहीं किए हैं। यह सभी दस्तावेज कोयला मंत्रालय के पास हैं। स्क्रीनिंग कमेटी की हर बैठक में क्या हुआ, इसका पूरा विवरण सीबीआई को सौंपा जाए।
अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार ने 40 आवंटन रद्द कर दिए हैं। इस पर अदालत ने उनसे कहा कि बाकी 164 आवंटनों से संबंधित कागजात सीबीआई को सौंपे जाएं। चार सप्ताह के अंदर विस्तृत हलफनामा अदालत में पेश किया जाए।