कोयला खदान आवंटन के मामले में यूपीए सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में कहा है कि कोयला खदानों के आवंटन में समान नीति नहीं अपनाई गई।
सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि कोयला खदानों के आवंटन में कई गंभीर खामियां पकड़ी गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आवंटन के मामले में कोयला मंत्रालय ने आवेदनों की ठीक से जांच नहीं की थी।
सीबीआई ने रिपोर्ट में कहा है कि कुछ कंपनियों ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके कोयले की खदानें हासिल की। वहीं, कंपनियों के ट्रैक रिकॉर्ड की जांच का भी कोई तरीका नहीं अपनाया गया।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वह केस की जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं, बल्कि सीधे कोर्ट को दे। कोर्ट ने सरकार से भी पूछा है कि जब काफी संख्या में बड़ी कंपनियों ने भी आवेदन दिया था, तो आखिर क्यों छोटी कंपनियों को कोयले की खदान आवंटित की गई।
क्या है मामला
पिछले साल संसद में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि कोयले की खदानों के आवंटन में साल 2004 से 2009 के बीच अनियमितताएं बरती गईं। बगैर नीलामी के बेहद सस्ती कीमतों पर खदानों से कोयला निकालने के ठेके निजी कंपनियों को दिए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि इससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।