सरकारी और निजी कंपनियों को आवंटित कोयला खदानों पर समय से काम पूरा नहीं करने वाली 11 कंपनियों की सफाई से नाखुश कोयला मंत्रालय ने इनका आवंटन निरस्त करने का फैसला लिया है।
इसमें राठी उद्योग लिमिटेड समेत कई बड़ी कंपनियों को आवंटित कोल ब्लॉक शामिल हैं। अन्य 19 कंपनियों पर जुर्माना लगाने या बैंक गारंटी जब्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोयला मंत्रालय की अंतर मंत्रालयी समूह की सिफारिश को मंजूर कर लिया गया है। समूह ने पिछले माह 30 कोल ब्लॉक के प्रदर्शन की समीक्षा की है।
इन कंपनियों से कोयला खदानों पर काम नहीं शुरू होने या धीमी प्रगति का कारण पूछा गया था। इसके बाद 11 कंपनियों का आवंटन निरस्त करने का निर्णय जबकि 19 पर जुर्माना लगाने या बैंक गारंटी जब्त करने की सिफारिश की गई है।
पिछले महीने कोल ब्लॉक आवंटियों से खदानों पर समय से काम पूरा नहीं होने या धीमी कार्य प्रगति को लेकर कारण पूछा गया था। इसके लिए सेल, एनटीपीसी, टाटा पावर, जेएसपीएल और मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड, भूषण स्टील, जीवीके पावर समेत कई नामीगिरामी कंपनियों ने कोल ब्लॉक संबंधी ब्यौरा आईएमजी के समक्ष पेश किया था।
इनकी दलीलों पर विस्तार से सुनवाई भी की गई थी। इन कंपनियों से कोल ब्लॉक के विकास के साथ निवेश योजनाओं के बारे में भी पूछा गया था। जबकि यह जानने की इच्छा भी जाहिर की गई थी कि जिन परियोजनाओं के विस्तार के लिए कोल ब्लॉक लिए गए थे उनकी मौजूदा स्थिति क्या है।
सेल को एक, एनटीपीसी को दो कोल परियोजनाओं में देरी को लेकर विस्तार में ब्यौरा पेश करने को कहा गया था। जबकि जीवीके पावर, अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर, भूषण स्टील एंड पावर, मोनेट इस्पात एंड एनर्जी को भी दिये गए ब्लॉकों के विकास का ब्यौरा मांगा गया था। इसके बाद आईएमजी ने समीक्षात्मक प्रक्रिया पूरी कर आवंटन निरस्त करने की सिफारिश की है।