गोंडा में सीएमओ प्रकरण के बाद सारे अफसरों ने पूरे जिले को भगवान भरोसे छोड़ दिया था। जिलाधिकारी अभय, सीडीओ अरविंद कुमार सिंह गायब हो गए थे, एडीएम के साथ पुलिस सुरक्षा में वहां से लखनऊ भेजे गए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह तीन दिन तक अज्ञातवास में रहे। सीएमओ पूरे तीन दिन तक गायब रहे। इस दौरान उन्हें लेकर कई तरह की आशंकाएं उठती रहीं।
सीएमओ को संविदा पर भर्ती के लिए अपनी गाड़ी में उठा ले जाने वाले पूर्व राज्यमंत्री के खिलाफ अब तक कोई जांच नहीं शुरू की गई है। उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की गई न ही कोई कानूनी कार्रवाई हुई। हालांकि शुक्रवार को गृह सचिव कमल सक्सेना ने कहा था कि सीएमओ के बयान केबाद आगे की कार्रवाई होगी। सीएमओ ने दफ्तर जॉइन करने के बाद मीडिया से बात की। उन्हें पुलिस सुरक्षा भी दी गई, लेकिन उनका बयान दर्ज करने कोई पुलिस अधिकारी नहीं गया।
माना जा रहा है कि सरकार ने पूर्व मंत्री विनोद सिंह के तुष्टिकरण की कोशिश है। विनोद सिंह सपा सुप्रीमो के खासे नजदीक रहे हैं, लिहाजा यह उन्हें भी राजी रखने की कवायद का हिस्सा है। सरकार का एक दिन पहले तक कहना था, सीएमओ तहरीर दें, कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक संतुलन
गोंडा की राजनीति का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार में इस छोटे जिले से दो मंत्री हैं। सपा की अंदरूनी सियासत में वहां दरअसल तीन ध्रुव हैं। अफसरों की पोस्टिंग में भी इनमें प्रतिद्वंद्विता रहती है। विनोद सिंह पर कार्रवाई से बाकी दो गुट हावी न हो जाएं। ऐसे में अफसरों के हटाए जाने कों ‘बैलेंसिंग एक्ट’ के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशासनिक सख्ती
एक तरह से यह संदेश देने की कोशिश भी है कि अगर हाकिम जिले को इस तरह छोड़ भागेंगे, तो सरकार महज मूकदर्शक नहीं रहेगी। कहीं कोई साजिश है, तो अफसरों को भी नहीं बख्शा जाएगा।
इन अफसरों को कमान
रोशन जैकब, डीएम : 2004 बैच की आईएएस अफसर की बतौर जिलाधिकारी यह दूसरी पोस्टिंग होगी। इससे पहले वे बस्ती में करीब सवा साल डीएम रहीं हैं। अभी वे श्रम व रोजगार विभाग में विशेष सचिव थीं।
नवनीत कुमार राणा, एसपी : 2000 बैच के आईपीएस प्रमोटी अफसर हैं। अभी तक वे एसपी (प्रशिक्षण) के तौर पर लखनऊ में तैनात थे।