उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में विकलांगों को ट्राईसाइकिल और अन्य सामान वितरित करने के लिए कैंपों का आयोजन ऑन पेपर ही हो गया। रिकार्ड में जिन गांवों में कैंप लगाने का जिक्र है, हकीकत में वे जिले में है ही नहीं। अब जांच शुरू हुई तो घपले की परतें खुलने लगी हैं।
जहांगीराबाद में विकलांग कैंप में घपले का मामला थमा भी नहीं था कि एक और नया मामला सामने आ गया है। सलमान खुर्शीद के डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल विकलांग कल्याण ट्रस्ट पर एक और आरोप लगा है। शासन ने जिला विकलांग कल्याण विभाग से रिपोर्ट मांगी है कि दो अप्रैल, 2010 को बुरहानपुर में विकलांग कल्याण कैंप लगाना दिखाया गया है। इस शिविर में 42 विकलांगों को उपकरण वितरित किए गए थे।
शासन को भेजे जवाब में विकलांग कल्याण विभाग का कहना है कि जनपद में बुरहानपुर नाम का कोई गांव ही नहीं है। बुरहानपुर खुर्द नाम का एक गांव है, जिसमें कभी कैंप नहीं लगाया गया। इसकी सत्यापन रिपोर्ट पर जिला विकलांग कल्याण अधिकारी और सीएमओ के हस्ताक्षर व मुहर फर्जी हैं। इस रिपोर्ट में जिन विकलांगों को पात्र दर्शाया गया है, उनको कभी कोई सहायता ही नहीं मिली है।
रिकार्ड में पुष्टि नहीं
जिला विकलांग कल्याण अधिकारी ने बताया कि पूरा मामला हवा में तैर रहा है। विभागीय रिकार्ड में दावों की पुष्टि नहीं हो पा रही है। पता ही नहीं है कि कैंप कहां, किसने लगाया और किनको उपकरण दिए।
हस्ताक्षर-मुहर, अस्पताल सब फर्जी
जांच अभियान में खुलासा हुआ है कि केवल पात्र ही नहीं, अस्पताल और मुहर-हस्ताक्षर सब कुछ फर्जी ही है। विकलांगों को सहायता के नाम पर शासन ने रिपोर्ट मांगी तो हड़कंप मच गया। केवल विकलांग कल्याण विभाग ने ही नहीं, स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। विकलांगों को उपकरण देने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराना दिखाया गया है।
ट्रस्ट ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बुलंदशहर में स्वास्थ्य परीक्षण होना दिखाया था। प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी बुलंदशहर के इस पर हस्ताक्षर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नाम का कोई केन्द्र बुलंदशहर मुख्यालय में नहीं है और न ही इस पद नाम का कोई चिकित्साधिकारी। अस्पताल के नाम के साथ ही ट्रस्ट की रिपोर्ट पर चिकित्साधिकारी की मुहर भी फर्जी है।
रिपोर्ट पर जिस आकार की मुहर लगी दिखाई गई है, ऐसी स्वास्थ्य विभाग में नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट की एक प्रति जिला विकलांग कल्याण कार्यालय को भी प्राप्त हुई है। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी ने बताया कि निदेशालय के पत्र के बाद चेक लिस्ट कराया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग से भी जांच मांगी गई थी, सब कुछ हवा-हवाई निकला है। बीडीओ से जिलेभर में जांच कराई जा रही है। एक साल पहले तत्कालीन सीडीओ ने बीडीओ को जांच पत्र भेजा था। बीबीनगर और ऊंचागांव को छोड़कर अन्य की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन जिलाध्यक्ष चौधरी श्यौपाल सिंह का कहना है कि कागजात में कहां पर गलती हुई इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन दिल से कोई गलती नहीं की गई है। विकलांगों को उपकरण बांटे गए हैं, रिकार्ड से मेल न खाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।