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तो फिलहाल बच गई वसुंधरा की कुर्सी, खतरा टला

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ललित मोदी की मदद कर मुसीबतों में घिरी राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ कार्रवाई का मामला फिलहाल टल गया है। भाजपा के साथ-साथ अब संघ भी इस मामले में फिलहाल वसुंधरा के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का पक्षधर है।
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सरकार और पार्टी का सारा ध्यान अब इस विवाद से निकलने के लिए ललित मोदी को भारत ला कर कानून का सामना कराने पर टिक गया है।

इस बीच वसुंधरा की ओर से पार्टी नेतृत्व को सफाई पेश करने वाले राष्ट्रीय सह संगठन महासचिव सौदान सिंह ने शुक्रवार को संघ नेतृत्व को भी मुंबई में वसुंधरा के पक्ष से अवगत कराया।

सौदान ने पार्टी के संगठन महासचिव रामलाल की उपस्थिति में भाजपा के प्रभारी कृष्णगोपाल और वरिष्ठ नेता भैयाजी जोशी के समक्ष वसुंधरा का पक्ष रखा।

वसुंधरा के तर्क से पार्टी और संघ संतुष्ट

बताते हैं कि इस मामले में वसुंधरा के पक्ष से संघ संतुष्ट है। इस बीच पार्टी नेतृत्व में विवाद का केंद्र फिर से दिल्ली केबन जाने के कारण वसुंधरा को शुक्रवार को राजस्थान में ही बने रहने का निर्देश दिया।

माना जा रहा है कि वसुंधरा अब शनिवार को दिल्ली आएंगी और नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के बाद बिना किसी वरिष्ठ नेता से मुलाकात के वापस राजस्थान लौट जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि वसुंधरा की मुसीबत उस समय ज्यादा बढ़ गई थी, जब मोदी के पक्ष में उनकी ओर से दिया गया हलफनामा सामने आया था।

इसके बाद वसुंधरा के खिलाफ कार्रवाई के मामले में पार्टी दो धड़े में बंट गई थी। वैसे भी वसुंधरा पर कार्रवाई करने वाले खेमे को उनकी ओर से बगावती तेवर दिखाने का भी डर सता रहा था।
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रणनीति के तहत टला वसुंधरा का दिल्ली दौरा

वसुंधरा राजे की कुर्सी पर से खतरा फिलहाल टल गया है। लंबी माथापच्ची के बाद भाजपा के साथ अब संघ ने भी वसुंधरा के बचाव का फैसला किया है। इस क्रम में वसुंधरा की सफाई से पार्टी नेतृत्व को अवगत कराने के बाद सौदान ने शुक्रवार को संघ को भी पूरे मामले की जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक सौदान ने संघ नेतृत्व को बताया कि वसुंधरा ललित के समर्थन में कभी लंदन की अदालत में पेश होने से इंकार किया था। इस दौरान सौदान ने संघ नेतृत्व को वसुंधरा और ललित मोदी के बीच दोस्ती केबाद अरसे से जारी तनातनी से भी अवगत कराया।

इस बीच अपना पक्ष रखने शुक्रवार को दिल्ली आने वाली वसुंधरा ने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर अपना दौरा रद्द कर दिया। पार्टी नेतृत्व को डर था कि अगर वसुंधरा दिल्ली आती तो केंद्र की राजनीति में एक बार फिर पूरे प्रकरण पर सियासी हलचल तेज हो जाती।

माना जा रहा है कि शनिवार को नीति आयोग की बैठक में शिरकत करने के लिए यहां आने वाले वसुंधरा किसी नेता से अलग से मुलाकात नहीं करेंगी।
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