चंदा मामा भला किसे पसंद नहीं? उसे सबसे करीब से देखने का मौका भी भला कौन छोड़ना चाहेगा? 23 जून यानी रविवार को चांद, अपने दीवानों को सबसे नजदीक से दीदार करने का मौका देने जा रहा है।
रविवार को 'सुपरमून' होगा जब पूरा चांद पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है और इसका आकार सबसे बड़ा दिखता है।
इस अद्भुत खगोलीय घटना में चंद्रमा पूर्णिमा के चंद्रमा के मुकाबले आकार में 15 प्रतिशत तक बड़ा नजर आता है। साथ ही 30 प्रतिशत ज्यादा चमकीला भी होता है।
इसे देखने के लिए लखनऊवासियों में भी जबरदस्त उत्साह है और खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले लोगों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी है।
इस मौके के लिए एक ओर लखनऊ के एमैच्यौर एस्ट्रोनॉट जहां समूह बनाकर ये घटना देखने की योजना बना रहे हैं तो दूसरी ओर इंदिरागांधी प्लेनेटोरियम ने भी नागरिकों के लिए इस मौके पर यादगार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्लेनेटोरियम प्रभारी अनिल यादव के अनुसार संस्थान अपने टेलीस्कोप के जरिये लोगों को सुपर मून को करीब से देखने का अवसर मुहैया कराएगा।
इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं और जल्द ही जगहों को चिह्नित किया जाएगा, जहां से इस घटना को दिखाया जा सकता है। वहीं, प्लेनेटोरियम के एजुकेटर सुमित सिंह ने बताया कि सुपर मून पिछली दफा 6 मई 2012 को हुआ था और अगला 10 अगस्त 2014 को होगा।
सुपर मून और कुछ रोचक तथ्य
- सुपर मून टर्म 19 मार्च 2011 को चंद्रमा के पृथ्वी के बहुत करीब आने पर चलन में आया।
- इस वर्ष सुपर मून करीब 1 घंटे कायम रहेगा।
- चंद्रमा और पृथ्वी की दूसरी 3,57,000 किमी से 4,06,000 किमी।
- सुपर मून के दिन पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी 10 से 500 किमी तक कम हो जाती है।
- औसतन हर 413 दिन बाद चंद्रमा पृथ्वी के इतना करीब आता है।
- 6 दिसंबर 2052 में चंद्रमा 3,56,421 किमी की दूरी पर होगा जो इस सदी में सबसे करीब होगा।
- यह 1 जनवरी 2257 में टूटेगा जब चंद्रमा 3,56,371 किमी की दूरी पर होगा।
- चंद्रमा हर वर्ष पृथ्वी से 1.5 इंच दूर जा रहा है, हमारे दिन हर सौ वर्ष में सेकंड के 500वें हिस्से जितने बड़े हो रहे हैं।