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अलीगढ़: चर्च बन गया मंदिर, 60 ईसाई बने हिंदू

Fri, 29 Aug 2014 07:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
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करीब 20 वर्ष पहले यूपी के जिला अलीगढ़ की तहसील इगलास के गांव असरोई में 8 हिंदू परिवारों के 60 सदस्यों को ईसाई धर्म में परिवर्तित कराया गया था। अब सोमवार को धर्म जागरण मंच और बजरंग दल द्वारा गांव में ही आयोजित एक कार्यक्रम में वापस इन परिवारों को हिंदू धर्म में दीक्षित कराया। इस दौरान गांव में बने चर्च से ईसाई धर्म के सभी प्रतीक हटा दिए गए और उसे मंदिर का रूप देने के लिए देवी-देवताओं के पोस्टर लगा दिए गए।
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इस दौरान वहां यज्ञ के साथ इन लोगों ने आहुतियां भी दीं। पूरे रीति-रिवाज से इन्हें हिंदू धर्म में शामिल किया गया। सालों से यह लोग वहां चर्च में ईसाई धर्म के अनुसार उपासना करते थे। अब जल्द ही वहां मूर्ति भी स्थापित करने की योजना है। इस मौके पर मुख्य रूप से धर्म जागरण समिति के पश्चिमी यूपी के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह, विपिनचंद्र लाल, बजरंग दल प्रांत सुरक्षा प्रमुख अभिषेक रंजन आर्य आदि मौजूद थे।

जागा प्रशासन, चर्च से हटाए गए देवता
मामला सुर्खियों में आने से प्रशासन भी हरकत में आ गया। जिस चर्च को मंदिर का रूप दे दिया गया था, आननफानन उसमें लगाए गए देवी-देवताओं के पोस्टर हटा दिए गए।
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'लोगों की इच्छा पर हिंदू धर्म में वापसी कराई है'
बजरंग दल के प्रांत सुरक्षा प्रमुख अभिषेक रंजन आर्य कहते हैं कि वहां इन परिवारों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जाहिर की थी। इसका शपथ पत्र आर्य समाज के पास है। इस पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। चर्च भी इन्हीं लोगों में से किसी की भूमि पर है। इन लोगों की इच्छा पर ही चर्च को मंदिर का रूप दिया गया है। अब आर्य समाज इन्हें हिंदू धर्म में शामिल होने का प्रमाण पत्र देगा।

दो दिन बाद गांव में बन गया तमाशे जैसा माहौल

गांव में पिछले दो दिन से तमाशे जैसा माहौल है। हिंदूवादियों ने जिन 8 परिवारों को हिंदू धर्म से जोड़ा था, वह मीडिया और प्रशासन के सवालों का जवाब देते-देते परेशान हैं। स्थिति यह है कि इन लोगों ने अब इस चर्च में जिसे मंदिर घोषित किया गया था, उसमें लगाए गए पोस्टर खुद हटा दिए हैं। चर्च पर कब्जे की सूचना पर खुद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की टीमें लगातार गांव में आ रही हैं और इन परिवार के लोगों से सवाल कर रही हैं। मीडिया में सुर्खियों में आने के बाद चर्च जिसे मंदिर बनाने की घोषणा की गई थी, वहां अब भगवान के पोस्टर नजर नहीं आ रहे। इन गतिविधियों को देख सहमे इन लोगों ने खुद ही इन्हें हटा लिया है। चर्च के बाहर उसकी स्थापना का पत्थर जरूर लगा है।

कहते हैं कि पहले भी हिंदू थे अब भी हिंदू हैं
इधर, जिस मिशनरी संस्था ने यह चर्च स्थापित कराया था, उस संस्था का इलाके का काम देख रहे पादरी विकास कुमार ने भी यहां आकर स्थिति देखी और चर्च की सुरक्षा को लेकर ग्राम प्रधान आदि से बात की। उन्हें प्रधान व अन्य लोगों ने भरोसा दिलाया कि इस भवन में कोई तोड़-फोड़ नहीं होगी। वैसे ग्राम प्रधान का कहना है कि यह लोग पहले भी हिंदू थे और अब भी हिंदू हैं। गांव के परिवार रजिस्टर में यह सभी परिवार दलितों के रूप में दर्ज हैं। इधर, ग्राम प्रधान शीला देवी व उनके पुत्र विकास का कहना था कि यह लोग पहले भी हिंदू थे और आज भी हिंदू हैं। गांव के परिवार रजिस्ट्रर में यह सभी हिंदू ही हैं। इनकी जाति वाल्मीकि है। इसके अन्य प्रमाण भी इन पर हैं

लगभग डेढ़ दशक पुराना है किस्सा
धर्म परिवर्तन का पूरा किस्सा करीब डेढ़ दशक पुराना है। बताते हैं कि गांव में वाल्मीकि समाज का एक युवक हाईस्कूल पढ़ गया। वह ईसाई धर्र्म के कुछ लोगों के संपर्क में आ गया। वहां वह धर्म के प्रचार-प्रसार में जुट गया। उसने अपने गांव के समाज के कुछ लोगों को ईसाई धर्म से जोड़ा। बताते हैं कि वहां ईसाई धर्म की एक संस्था के लोग भी आए और फिर ईसाई धर्म के रीति-रिवाज के हिसाब से इनका धर्म परिवर्तन कराया गया। थोड़े दिन बाद जहां झुग्गी-झोपडिय़ों में यह लोग रहते हैं, वहीं एक चर्च की स्थापना हो गई। हर शनिवार को एक पादरी वहां आकर इन्हें उपासना भी कराने लगा। चंद दिनों पहले हिंदूवादी संस्था से जुड़े एक व्यक्ति से इन लोगों का संपर्क हुआ। उसको जब गांव में चर्च आदि के बारे में पता चला तो उसने यह बात हिंदूवादियों को बताई। फिर हिंदूवादियों ने इन लोगों से मिलकर इन्हें हिंदू धर्म अपनाने को प्रेरित किया।
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उस समय बहुत से प्रलोभन दिए थे

इन्हीं में से गांव के एक परिवार के मुखिया राजवीर गौड़ कहते हैं कि हम लोग अनपढ़ थे। करीब 15 साल पहले जब हमे ईसाई धर्म से जोड़ा गया था तो यह लालच दिया गया था कि गांव में चर्च के साथ-साथ अस्पताल भी खुलेगा। बच्चों के लिए स्कूल भी खुलेगा और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

चर्च गांव में जरूर बना। राजेंद्र सिंह का भी यही कहना है कि हम ईसाई भी अपनी इच्छा से ही बने थे। हां उस समय कई लालच जरूर दिए गए थे कि बच्चों को अच्छी शिक्षा आदि मिलेगी। खाते भी खुलेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ईसाई धर्म में कोई नाते-रिश्तेदारी भी नहीं जुड़ी। ऐसे मे अब हमने खुद हिंदू धर्म में वापसी की है।

पादरी बोले पूजा अर्चना करते थे धर्म के अनुसार
इगलास के एसडीएम गुरुवार को वहां गए। उन्होंने भी इन लोगों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और पूछताछ की। गांव में एसडीए संस्था का चर्च स्थापित है। उसी का पत्थर लगा है। इस संस्था का इलाके में काम देख रहे पादरी विकास कुमार का कहना है कि वह संस्था का काम पूरे क्षेत्र में देखते हैं। उनका कहना है कि कोई किसी भी धर्म को अपना सकता है, इस पर किसी की कोई पर बंदिश नहीं है। उन्होंने भी यह स्वीकार किया कि यह लोग इस चर्च में पूजा-अर्चना करते थे।
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