कांग्रेस की बैठक हो और सोनिया राहुल उसमें उपस्थित हों तो फिर चरण वंदना करने से कोई पीछे नहीं रहता। अलंकारों से युक्त भाषा बोलने की कोशिश होती है। यह साबित करने की कोशिश होती है कि राहुल की प्रशंसा किसने सबसे बाजी मारी।
हालांकि इसका रिजल्ट किस तरह तैयार होता है, यह तो पता नहीं चलता , लेकिन स्तुति गान करने वाले गुड बुक में तो आने की कोशिश तो करते ही हैं। ज्यादा दिन नहीं हुए जब राहुल के बारे में कहा गया कि वो गुजरात में जहां जहां गए पार्टी चुनाव जीती।
इतना तो चल जाता लेकिन सियासत में कांग्रेसी नेता सब कुछ भूल गए, कहीं कोई शिकवा शिकायत नहीं रही, बस यह कह गए कि राहुल के माथे पर राजीव और इंदिरा के बलिदान का तिलक लगा हुआ है।
न जाने किस हिंदी के अध्यापक ने ऐसी सारगर्भित पंक्ति नेताजी को कहने के लिए दी होगी। एक ने तो सुभाष चंद्र बोस की तर्ज पर कह दिया सोनियाजी हमें राहुल दीजिए, हम देश बनाकर दिखाएंगे।
राहुल चालीसा पढ़ने में कौन पीछे रहने वाला था। लेकिन इसके विपरीत कुछ अलग ढंग से बाजी तो मणिशंकर अय्यर ने ही मार ली।
जहां राहुल सोनिया को खुश करने के लिए मोदी को दानव राक्षस सब कुछ कहा जा रहा था, मणिशंकर अय्यर की चाय वाली टिप्पणी की बड़ी चर्चा थी।
पता नहीं ऊंचे दरबार में इस टिप्पणी को किस तरह लिया गया, लेकिन राहुल गांधी ने किसी और बहाने उनका नाम लेकर उन्हें शाबाशी दे डाली। इधर राहुल ने शाबाशी दी, उधर पलक झपकते ही कांग्रेसी मणिशंकर अय्यर से हाथ मिलाने लगे। कांग्रेस पंरपरा के अपने अनूठे अंदाज है।