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'लोकायुक्त होता तो जेल में होते मोदी'

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे करारा प्रहार करते हुए कहा है कि अगर राज्य में लोकायुक्त और आरटीआई आयुक्त होते तो वजीफे के तौर पर अदाणी को हजारों एकड़ जमीन देने के आरोप में वह (मोदी) जेल में होते।
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राहुल ने कहा कि यहां कोई लोकायुक्त नहीं और न ही कोई आरटीआई आयुक्त हैं। यहां के उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से आरटीआई आयुक्त नियुक्त करने को कहा है। यहां पर 10 आयुक्त होने चाहिए लेकिन पांच भी नहीं है।

भावनगर लोकसभा क्षेत्र के देवगढ़ बरिया में एक रैली में राहुल ने कहा कि जो ताकत भ्रष्टाचारियों को पकड़ती है वह यहां नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस दिन लोकायुक्त और आरटीआई आयुक्त आ जाएंगे उस दिन आपके ‘चौकीदार’ भीतर चले जाएंगे।
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मोदी की मार्केटिंग का खर्च उठा रहे अदाणी: राहुल

गुजरात के अमरेली में राहुल ने कहा कि मोदी और उद्योगपति अदाणी के बीच सांठगांठ है, जिसके तहत अदाणी भाजपा नेता की मार्केटिंग का खर्च उठा रहे हैं।

राहुल ने गुजरात के विकास मॉडल को लेकर भी मोदी पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा के पीएम उम्मीदवार दूसरे लोगों की मेहनत का श्रेय ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी और अदाणी के बीच सांठगांठ के कारण भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा और सुषमा स्वराज जैसे वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया गया।
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मोदी पर जमकर बरसे राहुल

उन्होंने कहा कि दस साल पहले 3000 करोड़ रुपये की कंपनी आज 40 हजार करोड़ की हो गई है। इसे 26,000 करोड़ रुपये के बिजली कांट्रेक्ट पकड़ा दिए गए। जिन किसानों की जमीन अदाणी को दी गई है वे आज भी यूपीए की मनरेगा योजना के तहत मजदूरी कर रहे हैं।

मोदी ने केवल एक व्यक्ति को 40 हजार करोड़ रुपये का गिफ्ट पकड़ दिया जो राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कुल बजट 10 हजार करोड़ रुपये का चार गुना है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अदाणी को जो दिया उसी धन का अब मोदी की मार्केटिंग यानी चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है। देश भर में बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। उन्होंने पूछा कि इसके लिए पैसे कहां से आए।

उन्होंने कहा कि यही गुजरात मॉडल है। आप सभी फायदे एक उद्योगपति को दे देते हैं। यहां केवल एक ही आवाज आती है मैं मैं मैं...। लगता है कि गुजरात के लोगों ने कुछ नहीं किया। गुजरात की महिलाओं ने कुछ नहीं किया। गुजरात के शिक्षकों ने कुछ नहीं किया।
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