लद्दाख में चीनी घुसपैठ की समस्या से निपटने के बाद अब सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तीन चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से अरबी भाषा में स्थानीय मानचित्र मिले हैं।
लेह के सुल्तानचकु के पास भारतीय क्षेत्र में 12 जून को गिरफ्तार किए गए इन चीनी नागरिकों की पहचान आदिल, सलामो और अब्दुल खालिक के रूप में हुई है।
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को इनका नाम उगलवाने में दस दिन लग गए। 18 से 23 साल की उम्र के इन युवाओं में से एक व्यक्ति की एक आंख नहीं है।
तीनों को फिलहाल मुरगो पोस्ट में रखा गया है और उनकी भाषा समझने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनकी भाषा में एकरूपता नहीं है।
चीनी भाषा या फिर पीओके के बाल्टीस्तान की बाल्टी भाषा से उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा थोड़ी अलग है। वे सीमा पार किस क्षेत्र से आए हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं तीनों लोग राकी नाला, जीवन नाला या दौलत बेग ओल्डी के उत्तर से तो नहीं आएं। दौलत बेग ओल्डी में 15 अप्रैल से पांच मई तक चीनी सैनिकों की घुसपैठ को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया था।
इन तीनों से पूरी जानकारी हासिल करने के लिए इन्हें लेह शहर ले जाया जाएगा क्योंकि अनुवादक के माध्यम से ही इनकी भाषा समझी जा सकती है। इस साल लद्दाख क्षेत्र में खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग कट गया था। इसलिए तीनों से गहन पूछताछ के लिए अब प्रशासन ने उन्हें एयरलिफ्ट कर लेह लाने की अनुमति हासिल कर ली है।
यारकंडी भाषा का उपयोग
संभावना जताई जा रही है कि तीनों लोग यारकंडी भाषा का उपयोग कर रहे हैं, जो झिंजियांग प्रांत में बोली जाती है। यह प्रांत पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और लद्दाख के उत्तरी क्षेत्र से सटा हुआ है। इस क्षेत्र में यूघरू की बड़ी आबादी है।
हथियार भी बरामद
इन तीनों संदिग्धों के पास एक बड़ा राजनीतिक मैप और दो छोटे संस्करण बरामद हुए हैं, जो कि अरबी भाषा में लिखे हुए हैं। इसके अलावा इनके पास से आधुनिक तलवारें और चाकू के अलावा ऊंचे क्षेत्रों के लिए उपयोगी खाने के डिब्बे भी मिले हैं। साथ ही उनके पास से चीनी मुद्रा भी बरामद हुई है।